व
शायर

वली दकनी

ولی دکنی
Urdu1667–1707AurangabadGhazal
40
ग़ज़लें
40
कुल रचनाएं
ली दकनी (वली मुहम्मद वली) उर्दू ग़ज़ल के पहले प्रमुख उस्ताद और शास्त्रीय शायर माने जाते हैं। दकन (औरंगाबाद) में जन्मे वली ने फ़ारसी की शास्त्रीय काव्य-परंपरा को हिंदुस्तानी ज़बान और दकनी लहजे के साथ सहज रूप से मिलाया। उनके दीवान के दिल्ली पहुँचने के बाद ही उत्तर भारत में उर्दू शायरी को एक नया मुक़ाम और लोकप्रियता हासिल हुई।
प्रमुख रचनाएं

उनका संकलन 'कुल्लियात-ए-वली' उर्दू ग़ज़ल का ऐतिहासिक और बुनियादी ग्रंथ माना जाता है। "देखना हर सुब्ह तुझ रुख़्सार का" और "फ़िदा-ए-दिलबर-ए-रंगीं-अदा हूँ" जैसी ग़ज़लें उनके काव्य-सौंदर्य और भावुक अंदाज़ का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

शैली

वली ने फ़ारसी काव्य-शिल्प और बह्रों को भारतीय मुहावरे और दकनी भाषा के साथ जोड़कर एक मधुर शैली विकसित की। उनकी शायरी में हुस्न-ओ-इश्क़ के नाज़ुक जज़्बात, मौसीक़ी और सहज सादगी का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

सम्मान

साहित्यिक जगत में उन्हें 'बाबा-ए-रेख़्ता' के नाम से जाना जाता है और उन्हें उत्तर एवं दक्षिण भारत की साझी काव्य-संस्कृति का सेतु माना जाता है।

ग़ज़लें
संग्रह
आज दिस्ता है हाल कुछ का कुछ
अभी गीत नहीं
→
आज सरसब्ज़ कोह ओ सहरा है
अभी गीत नहीं
→
आशिक़ के मुख पे नैन के पानी को देख तूँ
अभी गीत नहीं
→
अगर गुलशन तरफ़ वो नौ-ख़त-ए-रंगीं-अदा निकले
अभी गीत नहीं
→
भड़के है दिल की आतिश तुझ नेह की हवा सूँ
अभी गीत नहीं
→
छुपा हूँ मैं सदा-ए-बाँसुली में
अभी गीत नहीं
→
देखना हर सुब्ह तुझ रुख़्सार का
अभी गीत नहीं
→
दिल हुआ है मिरा ख़राब-ए-सुख़न
अभी गीत नहीं
→
दिल कूँ तुझ बाज बे-क़रारी है
अभी गीत नहीं
→
दिल तलबगार-ए-नाज़-ए-मह-वश है
अभी गीत नहीं
→
फ़िदा-ए-दिलबर-ए-रंगीं-अदा हूँ
अभी गीत नहीं
→
हुआ ज़ाहिर ख़त-ए-रू-ए-निगार आहिस्ता-आहिस्ता
अभी गीत नहीं
→
हुए हैं राम पीतम के नयन आहिस्ता-आहिस्ता
अभी गीत नहीं
→
इश्क़ बेताब-ए-जाँ-गुदाज़ी है
अभी गीत नहीं
→
इश्क़ में सब्र-ओ-रज़ा दरकार है
अभी गीत नहीं
→
जब सनम कूँ ख़याल-ए-बाग़ हुआ
अभी गीत नहीं
→
जब तुझ अरक़ के वस्फ़ में जारी क़लम हुआ
अभी गीत नहीं
→
जिस दिलरुबा सूँ दिल कूँ मिरे इत्तिहाद है
अभी गीत नहीं
→
जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे
अभी गीत नहीं
→
कमर उस दिलरुबा की दिलरुबा है
अभी गीत नहीं
→
ख़ूब-रू ख़ूब काम करते हैं
अभी गीत नहीं
→
किया मुझ इश्क़ ने ज़ालिम कूँ आब आहिस्ता आहिस्ता
अभी गीत नहीं
→
कूचा-ए-यार ऐन कासी है
अभी गीत नहीं
→
मैं आशिक़ी में तब सूँ अफ़्साना हो रहा हूँ
अभी गीत नहीं
→
मैं तुझे आया हूँ ईमाँ बूझ कर
अभी गीत नहीं
→
मत ग़ुस्से के शो'ले सूँ जलते कूँ जलाती जा
अभी गीत नहीं
→
मुफ़्लिसी सब बहार खोती है
अभी गीत नहीं
→
मुश्ताक़ हैं उश्शाक़ तिरी बाँकी अदा के
अभी गीत नहीं
→
रूह बख़्शी है काम तुझ लब का
अभी गीत नहीं
→
सजन टुक नाज़ सूँ मुझ पास आ आहिस्ता आहिस्ता
अभी गीत नहीं
→
40 में से 30
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