ब
शायर

बहादुर शाह ज़फ़र

بہادر شاہ ظفر
Urdu1775–1862DelhiGhazal
50
ग़ज़लें
50
कुल रचनाएं
हादुर शाह ज़फ़र (1775–1862) भारत के अंतिम मुग़ल सम्राट और एक संवेदनशील उर्दू शायर थे। उनकी शायरी में सल्तनत के पतन, वतन की जुदाई और निजी दुखों का गहरा दर्द झलकता है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद उन्हें रंगून निर्वासित कर दिया गया, जहाँ उनकी मार्मिक ग़ज़लें आज़ादी और विरह का प्रतीक बन गईं।
प्रमुख रचनाएं

ज़फ़र ने चार मुकम्मल दीवान संकलित किए, जिनमें सैकड़ों ग़ज़लें मौजूद हैं। 'बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी' और 'लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में' जैसी उनकी ग़ज़लें दर्द और नफ़ासत की मिसाल हैं। उनके कलाम में निजी तबाही और सूफ़ी वैराग्य की गहरी अभिव्यक्ति मिलती है।

शैली

उन्होंने अपनी शायरी की इस्लाह पहले शेख़ इब्राहीम ज़ौक़ और बाद में मिर्ज़ा ग़ालिब से ली। ज़फ़र का अंदाज़-ए-बयां सीधा, संगीतमय और जज़्बाती है, जो दिल्ली के क्लासिकी दबिस्तान की नज़ाकत को दर्शाता है।

सम्मान

मुग़ल सल्तनत के आख़िरी चराग़ के रूप में उनका साहित्यिक स्थान इतिहास और आज़ादी की दास्तान से जुड़ा है। उपमहाद्वीप के शीर्ष ग़ज़ल गायकों द्वारा गाए जाने के कारण उनकी रचनाएँ आज भी बेहद लोकप्रिय हैं।

ग़ज़लें
संग्रह
बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी
अभी गीत नहीं
→
भरी है दिल में जो हसरत कहूँ तो किस से कहूँ
अभी गीत नहीं
→
देख दिल को मिरे ओ काफ़िर-ए-बे-पीर न तोड़
अभी गीत नहीं
→
देखो इंसाँ ख़ाक का पुतला बना क्या चीज़ है
अभी गीत नहीं
→
गालियाँ तनख़्वाह ठहरी है अगर बट जाएगी
अभी गीत नहीं
→
गई यक-ब-यक जो हवा पलट नहीं दिल को मेरे क़रार है
अभी गीत नहीं
→
है दिल को जो याद आई फ़लक-ए-पीर किसी की
अभी गीत नहीं
→
हम ने तिरी ख़ातिर से दिल-ए-ज़ार भी छोड़ा
अभी गीत नहीं
→
हम ये तो नहीं कहते कि ग़म कह नहीं सकते
अभी गीत नहीं
→
हवा में फिरते हो क्या हिर्स और हवा के लिए
अभी गीत नहीं
→
हिज्र के हाथ से अब ख़ाक पड़े जीने में
अभी गीत नहीं
→
होते होते चश्म से आज अश्क-बारी रह गई
अभी गीत नहीं
→
इश्क़ तो मुश्किल है ऐ दिल कौन कहता सहल है
अभी गीत नहीं
→
इतना न अपने जामे से बाहर निकल के चल
अभी गीत नहीं
→
जब कभी दरिया में होते साया-अफ़गन आप हैं
अभी गीत नहीं
→
जब कि पहलू में हमारे बुत-ए-ख़ुद-काम न हो
अभी गीत नहीं
→
जिगर के टुकड़े हुए जल के दिल कबाब हुआ
अभी गीत नहीं
→
काफ़िर तुझे अल्लाह ने सूरत तो परी दी
अभी गीत नहीं
→
करेंगे क़स्द हम जिस दम तुम्हारे घर में आवेंगे
अभी गीत नहीं
→
ख़्वाह कर इंसाफ़ ज़ालिम ख़्वाह कर बेदाद तू
अभी गीत नहीं
→
क्या कहूँ दिल माइल-ए-ज़ुल्फ़-ए-दोता क्यूँकर हुआ
अभी गीत नहीं
→
क्या कुछ न किया और हैं क्या कुछ नहीं करते
अभी गीत नहीं
→
क्यूँकर न ख़ाकसार रहें अहल-ए-कीं से दूर
अभी गीत नहीं
→
क्यूँकि हम दुनिया में आए कुछ सबब खुलता नहीं
अभी गीत नहीं
→
लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में
अभी गीत नहीं
→
मैं हूँ आसी कि पुर-ख़ता कुछ हूँ
अभी गीत नहीं
→
मर गए ऐ वाह उन की नाज़-बरदारी में हम
अभी गीत नहीं
→
मोहब्बत चाहिए बाहम हमें भी हो तुम्हें भी हो
अभी गीत नहीं
→
न दाइम ग़म है ने इशरत कभी यूँ है कभी वूँ है
अभी गीत नहीं
→
न दो दुश्नाम हम को इतनी बद-ख़़ूई से क्या हासिल
अभी गीत नहीं
→
50 में से 30
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