ग़ज़ल
फिरे राह से वो यहाँ आते आते
پھرے راہ سے وہ یہاں آتے آتے
यह ग़ज़ल इंतज़ार की तड़प, विरह की वेदना और जीवन के अंतिम पलों की त्रासदी को बयां करती है। इसमें प्रेमी का यह दर्द झलकता है कि महबूब रास्ते से ही लौट गया और जब तक उसकी मेहरबानी पहुँची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
Source: rekhta · HI
गीत सुनें
1
फिरे राह से वो यहाँ आते आते
अजल मर रही तू कहाँ आते आते
महबूब यहाँ आते-आते रास्ते से ही वापस लौट गया, और ऐ मौत, तू यहाँ आते-आते कहाँ मर गई कि अब तक नहीं आई?
2
न जाना कि दुनिया से जाता है कोई
बहुत देर की मेहरबाँ आते आते
आपने यह नहीं समझा कि कोई इस दुनिया से जा रहा है; ऐ मेहरबान, आपने आते-आते बहुत देर कर दी।
3
सुना है कि आता है सर नामा-बर का
कहाँ रह गया अरमुग़ाँ आते आते
मैंने सुना है कि संदेशवाहक का सिर आ रहा है; यह तोहफ़ा यहाँ तक पहुँचते-पहुँचते आख़िर कहाँ रह गया?
4
यक़ीं है कि हो जाए आख़िर को सच्ची
मिरे मुँह में तेरी ज़बाँ आते आते
मुझे पूरा यक़ीन है कि आख़िरकार यह बात सच हो जाएगी, जब तक तुम्हारी ज़बान मेरे मुँह में आएगी।
5
सुनाने के क़ाबिल जो थी बात उन को
वही रह गई दरमियाँ आते आते
जो बात वास्तव में उन्हें बताने के योग्य थी, वही बात सामने आते-आते या बातचीत के बीच में अनकही रह गई।
6
मुझे याद करने से ये मुद्दआ था
निकल जाए दम हिचकियाँ आते आते
क्या मुझे याद करने का तुम्हारा यह मक़सद था कि लगातार हिचकियाँ आते-आते मेरी जान ही निकल जाए?
7
अभी सिन ही क्या है जो बेबाकियाँ हों
उन्हें आएँगी शोख़ियाँ आते आते
अभी उनकी उम्र ही क्या है कि उनमें बेबाकी या निडरता हो; शोख़ी और नटखटपन तो उनमें धीरे-धीरे समय के साथ ही आएगा।
8
कलेजा मिरे मुँह को आएगा इक दिन
यूँही लब पर आह-ओ-फ़ुग़ाँ आते आते
एक दिन मेरा कलेजा मुँह को आ जाएगा, क्योंकि इसी तरह लगातार मेरे होंठों पर आहें और फ़रियादें आती जा रही हैं।
9
चले आते हैं दिल में अरमान लाखों
मकाँ भर गया मेहमाँ आते आते
दिल में लाखों अरमान चले आ रहे हैं, और मेहमानों के लगातार आते रहने से यह घर पूरी तरह भर गया है।
10
नतीजा न निकला थके सब पयामी
वहाँ जाते जाते यहाँ आते आते
वहाँ जाने और यहाँ वापस आने के चक्कर में सारे संदेशवाहक थक गए, मगर कोई नतीजा नहीं निकला।
11
तुम्हारा ही मुश्ताक़-ए-दीदार होगा
गया जान से इक जवाँ आते आते
वह ज़रूर तुम्हारा ही दीदार करने का तलबगार रहा होगा, क्योंकि तुम्हारे पास आते-आते एक नौजवान अपनी जान गँवा बैठा।
12
तिरी आँख फिरते ही कैसा फिरा है
मिरी राह पर आसमाँ आते आते
जैसे ही तुम्हारी नज़र मुझसे फिरी, वैसे ही आसमान (किस्मत) भी पलट गया, जबकि वह मेरे अनुकूल होने ही वाला था।
13
पड़ा है बड़ा पेच फिर दिल-लगी में
तबीअत रुकी है जहाँ आते आते
प्रेम या दिललगी के मामले में फिर से एक बड़ी उलझन आ गई है, और दिल वहीं आकर रुक गया है जहाँ वह बस पहुँचने ही वाला था।
14
मिरे आशियाँ के तो थे चार तिनके
चमन उड़ गया आँधियाँ आते आते
मेरे घोंसले में तो बस चार तिनके ही थे, मगर आँधियों के आते-आते पूरा बाग़ ही उजड़ कर उड़ गया।
15
किसी ने कुछ उन को उभारा तो होता
न आते न आते यहाँ आते आते
काश किसी ने उन्हें थोड़ा सा भी उकसाया या मनाया होता, तो न-न करते हुए भी वे आखिरकार यहाँ आ ही जाते।
16
क़यामत भी आती थी हमराह उस के
मगर रह गई हम-इनाँ आते आते
क़यामत भी उसके साथ-साथ ही आ रही थी, मगर आते-आते वह उसकी बराबरी करने और साथ चलने में पीछे छूट गई।
17
बना है हमेशा ये दिल बाग़ ओ सहरा
बहार आते आते ख़िज़ाँ आते आते
यह दिल हमेशा बाग़ और रेगिस्तान बनता रहा है, जब तक बहार आती रही और जब तक पतझड़ आता रहा।
18
नहीं खेल ऐ 'दाग़' यारों से कह दो
कि आती है उर्दू ज़बाँ आते आते
ऐ दाग़, अपने दोस्तों से कह दो कि यह कोई आसान खेल नहीं है; उर्दू ज़बान पर महारत धीरे-धीरे और वक़्त के साथ ही हासिल होती है।
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