द
शायर

दाग़ देहलवी

داغ دہلوی
Urdu1831–1905DelhiGhazalMasnavi
50
ग़ज़लें
50
कुल रचनाएं
वाब मिर्ज़ा ख़ान 'दाग़' देहलवी उर्दू अदब के मुम्ताज़ और लोकप्रिय क्लासिकी शायरों में शुमार हैं। उनकी शायरी दिल्ली की टकसाली ज़बान, साफ़गोई, दिलकश शोख़ी और जज़्बात के सहज इज़हार के लिए जानी जाती है। उन्होंने अल्लामा इक़बाल और जिगर मुरादाबादी समेत सैकड़ों शागिर्दों की शायरी को तराशा।
प्रमुख रचनाएं

दाग़ का कलाम चार प्रमुख दीवानों में संकलित है: 'गुलज़ार-ए-दाग़', 'आफ़्ताब-ए-दाग़', 'माहताब-ए-दाग़' और 'यादगार-ए-दाग़'। उनकी मशहूर ग़ज़लों में 'आप का ए'तिबार कौन करे' और 'अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता' शामिल हैं। उन्होंने 'फ़रियाद-ए-दाग़' नामक मसनवी भी रची।

शैली

लाल क़िले के माहौल में पले-बढ़े दाग़ ने उस्ताद ज़ौक़ से शायरी सीखी और दिल्ली की मुहावरेदार ज़बान को अपनी पहचान बनाया। उनकी शायरी में दार्शनिक उलझनों के बजाय हुस्न-ओ-इश्क़ की शोख़ी, साफ़गोई और ज़बान की नफ़ासत नुमायाँ है।

सम्मान

हैदराबाद के निज़ाम मीर महबूब अली ख़ान के उस्ताद बनने पर उन्हें 'फ़सीह-उल-मुल्क' और 'नवाब निज़ाम यार जंग' जैसे प्रतिष्ठित ख़िताबों से नवाज़ा गया।

ग़ज़लें
संग्रह
आप का ए'तिबार कौन करे
अभी गीत नहीं
→
आरज़ू है वफ़ा करे कोई
अभी गीत नहीं
→
अभी हमारी मोहब्बत किसी को क्या मालूम
अभी गीत नहीं
→
अब वो ये कह रहे हैं मिरी मान जाइए
अभी गीत नहीं
→
अच्छी सूरत पे ग़ज़ब टूट के आना दिल का
अभी गीत नहीं
→
अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता
अभी गीत नहीं
→
बाक़ी जहाँ में क़ैस न फ़रहाद रह गया
अभी गीत नहीं
→
बात मेरी कभी सुनी ही नहीं
अभी गीत नहीं
→
भवें तनती हैं ख़ंजर हाथ में है तन के बैठे हैं
अभी गीत नहीं
→
देख कर जोबन तिरा किस किस को हैरानी हुई
अभी गीत नहीं
→
दिल चुरा कर नज़र चुराई है
अभी गीत नहीं
→
दिल-ए-नाकाम के हैं काम ख़राब
अभी गीत नहीं
→
दिल गया तुम ने लिया हम क्या करें
अभी गीत नहीं
→
दिल को क्या हो गया ख़ुदा जाने
अभी गीत नहीं
→
दिल परेशान हुआ जाता है
अभी गीत नहीं
→
फ़लक देता है जिन को ऐश उन को ग़म भी होते हैं
अभी गीत नहीं
→
ग़ैर को मुँह लगा के देख लिया
अभी गीत नहीं
→
ग़म से कहीं नजात मिले चैन पाएँ हम
अभी गीत नहीं
→
ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया
अभी गीत नहीं
→
इधर देख लेना उधर देख लेना
अभी गीत नहीं
→
इन आँखों ने क्या क्या तमाशा न देखा
अभी गीत नहीं
→
इस अदा से वो जफ़ा करते हैं
अभी गीत नहीं
→
इस नहीं का कोई इलाज नहीं
अभी गीत नहीं
→
जल्वे मिरी निगाह में कौन-ओ-मकाँ के हैं
अभी गीत नहीं
→
जो हो सकता है उस से वो किसी से हो नहीं सकता
अभी गीत नहीं
→
काबे की है हवस कभी कू-ए-बुताँ की है
अभी गीत नहीं
→
कहते हैं जिस को हूर वो इंसाँ तुम्हीं तो हो
अभी गीत नहीं
→
कौन सा ताइर-ए-गुम-गश्ता उसे याद आया
अभी गीत नहीं
→
ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया
अभी गीत नहीं
→
ले चला जान मिरी रूठ के जाना तेरा
अभी गीत नहीं
→
50 में से 30
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