तुम्हारा ही मुश्ताक़-ए-दीदार होगा — दाग़ देहलवी

तुम्हारा ही मुश्ताक़-ए-दीदार होगा गया जान से इक जवाँ आते आते

“It must have been your sight alone that he yearned to see; a young man lost his life even as he drew near to thee.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

वह ज़रूर तुम्हारा ही दीदार करने का तलबगार रहा होगा, क्योंकि तुम्हारे पास आते-आते एक नौजवान अपनी जान गँवा बैठा।

विस्तार

इस शेर में महबूब के दीदार की चाहत और उसकी जानलेवा तड़प को बेहद संजीदगी से बयां किया गया है। शायर देखता है कि एक नौजवान मंज़िल तक पहुँचते-पहुँचते अपनी जान गँवा बैठा, और वह तुरंत समझ जाता है कि यह क़ुर्बानी ज़रूर उसी ख़ास महबूब के दीदार की हसरत में दी गई होगी। इश्क़ का यह रास्ता इतना पुरदर्द और गहरा है कि उस तक पहुँचने की तलब ही आशिक़ की ज़िंदगी ले लेती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.