क़यामत भी आती थी हमराह उस के — दाग़ देहलवी
क़यामत भी आती थी हमराह उस के
मगर रह गई हम-इनाँ आते आते
“Even Doomsday had set out by her side, yet it fell behind, unable to keep her pace.”
— दाग़ देहलवी
अर्थ
क़यामत भी उसके साथ-साथ ही आ रही थी, मगर आते-आते वह उसकी बराबरी करने और साथ चलने में पीछे छूट गई।
विस्तार
शायर महबूब के हुस्न और उनकी चाल की दिलकश तबाही बयां करते हुए कहते हैं कि जब वह चले, तो क़यामत भी उनके साथ क़दम से क़दम मिलाकर चली थी। मगर महबूब का नाज़ो-अंदाज़ इतना तेज़ और बेमिसाल था कि ख़ुद क़यामत भी उनकी बराबरी न कर सकी और पीछे छूट गई। यह महबूब की आमद से मचने वाली हलचल और उनकी बेपनाह कशिश की एक बेहद हसीन और नशीली तारीफ़ है।
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