नतीजा न निकला थके सब पयामी — दाग़ देहलवी
“No outcome ever came to light, all the couriers grew weary / In endlessly going over there, and coming back over here.”
अर्थ
वहाँ जाने और यहाँ वापस आने के चक्कर में सारे संदेशवाहक थक गए, मगर कोई नतीजा नहीं निकला।
विस्तार
इस शेर में आशिक़ और महबूब के बीच के उस थका देने वाले फासले को बड़ी सादगी से बयां किया गया है, जहाँ हर कोशिश बेअसर साबित होती है। दोनों के दरमियान बात बनाने और पैग़ाम पहुँचाने वाले सारे हरकारे (पयामी) चक्कर काट-काट कर थक गए, मगर कोई नतीजा नहीं निकला। यह उस लाचारी की सच्ची तस्वीर है जहाँ मोहब्बत में सारी कोशिशें महबूब की बेरुखी की दीवार से टकराकर दम तोड़ देती हैं।
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