अ
शायर

अल्ताफ़ हुसैन हाली

الطاف حسین حالی
Urdu1837–1914PanipatGhazalNazmMusaddas
28
ग़ज़लें
28
कुल रचनाएं
ौलाना अल्ताफ़ हुसैन हाली उर्दू के एक युगांतरकारी शायर, आलोचक और जीवनी लेखक थे, जिन्होंने उर्दू साहित्य के आधुनिकीकरण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। पानीपत में जन्मे हाली, मिर्ज़ा ग़ालिब के शागिर्द थे और बाद में सर सैयद अहमद ख़ान के अलीगढ़ आंदोलन के प्रमुख विचारक बने। उनकी सुधारवादी शायरी और वैचारिक रचनाओं ने उर्दू शायरी को दरबारी शैली से बाहर निकालकर सामाजिक चेतना और यथार्थ से जोड़ा।
प्रमुख रचनाएं

हाली की सबसे प्रसिद्ध कृति 'मद्-ओ-जज़्र-ए-इस्लाम' है, जिसे 'मुसद्दस-ए-हाली' के नाम से जाना जाता है और जिसने उपमहाद्वीप के मुसलमानों में सामाजिक चेतना जगाई। उनकी पुस्तक 'मुक़द्दमा-ए-शेर-ओ-शायरी' आधुनिक उर्दू आलोचना का पहला और अत्यंत प्रभावशाली घोषणापत्र मानी जाती है। इसके अलावा उन्होंने 'यादगार-ए-ग़ालिब' और 'हयात-ए-जावेद' जैसी महत्वपूर्ण जीवनियाँ भी लिखीं।

शैली

मिर्ज़ा ग़ालिब के मार्गदर्शन और सर सैयद अहमद ख़ान के विचारों से प्रभावित होकर हाली ने शायरी को सादगी और उद्देश्यपरक रूप दिया। उनकी शैली में कृत्रिम आलंकारिकता के बजाय स्पष्टता, प्राकृतिक भाव और नैतिक संदेशों की प्रधानता रही।

सम्मान

साहित्यिक सेवाओं के सम्मान में 1904 में ब्रिटिश सरकार ने उन्हें 'शम्स-उल-उलेमा' की उपाधि से विभूषित किया। वे आधुनिक उर्दू आलोचना और समाजिक सुधारवादी शायरी के पुरोधा के रूप में सम्मानित हैं।

ग़ज़लें
संग्रह
आगे बढ़े न क़िस्सा-ए-इश्क़-ए-बुताँ से हम
अभी गीत नहीं
→
अब वो अगला सा इल्तिफ़ात नहीं
अभी गीत नहीं
→
बात कुछ हम से बन न आई आज
अभी गीत नहीं
→
बुरी और भली सब गुज़र जाएगी
अभी गीत नहीं
→
धूम थी अपनी पारसाई की
अभी गीत नहीं
→
दिल को दर्द-आश्ना किया तू ने
अभी गीत नहीं
→
दिल से ख़याल-ए-दोस्त भुलाया न जाएगा
अभी गीत नहीं
→
ग़म-ए-फ़ुर्क़त ही में मरना हो तो दुश्वार नहीं
अभी गीत नहीं
→
घर है वहशत-ख़ेज़ और बस्ती उजाड़
अभी गीत नहीं
→
गो जवानी में थी कज-राई बहुत
अभी गीत नहीं
→
है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूब-तर कहाँ
अभी गीत नहीं
→
है ये तकिया तिरी अताओं पर
अभी गीत नहीं
→
हक़ीक़त महरम-ए-असरार से पूछ
अभी गीत नहीं
→
हक़ वफ़ा के जो हम जताने लगे
अभी गीत नहीं
→
हश्र तक याँ दिल शकेबा चाहिए
अभी गीत नहीं
→
इश्क़ को तर्क-ए-जुनूँ से क्या ग़रज़
अभी गीत नहीं
→
जीते जी मौत के तुम मुँह में न जाना हरगिज़
अभी गीत नहीं
→
जुनूँ कार-फ़रमा हुआ चाहता है
अभी गीत नहीं
→
कब्क ओ क़ुमरी में है झगड़ा कि चमन किस का है
अभी गीत नहीं
→
कह दो कोई साक़ी से कि हम मरते हैं प्यासे
अभी गीत नहीं
→
कर के बीमार दी दवा तू ने
अभी गीत नहीं
→
ख़ूबियाँ अपने में गो बे-इंतिहा पाते हैं हम
अभी गीत नहीं
→
कोई महरम नहीं मिलता जहाँ में
अभी गीत नहीं
→
मैं तो मैं ग़ैर को मरने से अब इंकार नहीं
अभी गीत नहीं
→
रंज और रंज भी तन्हाई का
अभी गीत नहीं
→
उस के जाते ही ये क्या हो गई घर की सूरत
अभी गीत नहीं
→
वाँ अगर जाएँ तो ले कर जाएँ क्या
अभी गीत नहीं
→
वस्ल का उस के दिल-ए-ज़ार तमन्नाई है
अभी गीत नहीं
→
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