ग़ज़ल
बुरी और भली सब गुज़र जाएगी
بری اور بھلی سب گزر جائے گی
यह ग़ज़ल जीवन की नश्वरता और समय के निरंतर प्रवाह को दर्शाती है। इसमें यह आशावादी संदेश दिया गया है कि अच्छे और बुरे दोनों दौर बीत जाते हैं और जीवन की नैया अंततः पार लग ही जाती है।
Source: rekhta · HI
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1
बुरी और भली सब गुज़र जाएगी
ये कश्ती यूँही पार उतर जाएगी
अच्छा और बुरा हर तरह का वक्त बीत जाएगा और जिंदगी की यह कश्ती यूं ही पार लग जाएगी।
2
मिलेगा न गुलचीं को गुल का पता
हर इक पंखुड़ी यूँ बिखर जाएगी
फूल चुनने वाले को फूल का कोई निशान नहीं मिलेगा, क्योंकि उसकी हर एक पंखुड़ी इस तरह बिखर जाएगी।
3
रहेंगे न मल्लाह ये दिन सदा
कोई दिन में गंगा उतर जाएगी
हे मल्लाह, ये दिन हमेशा ऐसे नहीं रहेंगे; कुछ ही दिनों में गंगा का पानी उतर जाएगा।
4
इधर एक हम और ज़माना उधर
ये बाज़ी तो सो बिसवे हर जाएगी
एक तरफ अकेले हम हैं और दूसरी तरफ पूरी दुनिया है, इसलिए यह बाज़ी तो निश्चित रूप से हार ही जाएगी।
5
बनावट की शेख़ी नहीं रहती शैख़
ये इज़्ज़त तो जाएगी पर जाएगी
हे शैख़, दिखावे और बनावट का घमंड कभी टिकता नहीं है, तुम्हारी यह इज़्ज़त यक़ीनन एक न एक दिन चली ही जाएगी।
6
न पूरी हुई हैं उमीदें न हों
यूँही उम्र सारी गुज़र जाएगी
न तो कभी उम्मीदें पूरी हुई हैं और न आगे होंगी, और बस इसी तरह यह पूरी ज़िंदगी बीत जाएगी।
7
सुनेंगे न 'हाली' की कब तक सदा
यही एक दिन काम कर जाएगी
लोग आख़िर कब तक 'हाली' की आवाज़ नहीं सुनेंगे? एक दिन यही पुकार ज़रूर अपना असर दिखाएगी।
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