ग़ज़ल

कर के बीमार दी दवा तू ने

کر کے بیمار دی دوا تو نے
अल्ताफ़ हुसैन हाली· Ghazal· 7 shers· radif: तू ने

यह ग़ज़ल प्रेम के उस विरोधाभास को उजागर करती है जहाँ महबूब ही दिल को घायल करता है और वही उसका इलाज भी बनता है। इसमें समर्पण, विरह की तड़प और अंततः आध्यात्मिक अमरता व सुकून पाने के गहरे अहसास को व्यक्त किया गया है।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
कर के बीमार दी दवा तू ने जान से पहले दिल लिया तू ने
2
रह-रव-ए-तिश्ना-लब न घबराना अब लिया चश्मा-ए-बक़ा तू ने
3
शैख़ जब दिल ही दैर में न लगा आ के मस्जिद से क्या लिया तू ने
4
दूर हो ऐ दिल-ए-मआल अंदेश खो दिया उम्र का मज़ा तू ने
5
एक बेगाना वार कर के निगाह क्या किया चश्म-ए-आश्ना तू ने
6
दिल ओ दीं खो के आए थे सू-ए-दैर याँ भी सब कुछ दिया ख़ुदा तू ने
7
ख़ुश है उम्मीद-ए-ख़ुल्द पर 'हाली' कोई पूछे कि क्या किया तू ने
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कर के बीमार दी दवा तू ने | Sukhan AI