غزل

اک لفظ محبت کا ادنیٰ یہ فسانا ہے

اک لفظ محبت کا ادنیٰ یہ فسانا ہے
جگر مرادآبادی· Ghazal· 22 shers· radif: है

یہ غزل محبت کی وسعت، پاکیزگی اور اس کی روحانی حیثیت کو خوبصورتی سے بیان کرتی ہے۔ اس میں دکھایا گیا ہے کہ عشق سمٹے تو عاشق کا دل اور پھیلے تو سارا جہاں بن جاتا ہے، جہاں یاد اور ہجر کا ہر آنسو عبادت اور تسبیح کا دانہ بن جاتا ہے۔

Source: rekhta · HI

نغمہ سنیں
ابھی نغمہ نہیں
رسم الخط
1
इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है
اک لفظ محبت کا ادنیٰ یہ فسانا ہے سمٹے تو دل عاشق پھیلے تو زمانا ہے
2
ये किस का तसव्वुर है ये किस का फ़साना है जो अश्क है आँखों में तस्बीह का दाना है
یہ کس کا تصور ہے یہ کس کا فسانا ہے جو اشک ہے آنکھوں میں تسبیح کا دانا ہے
3
दिल संग-ए-मलामत का हर-चंद निशाना है दिल फिर भी मिरा दिल है दिल ही तो ज़माना है
دل سنگ ملامت کا ہر چند نشانا ہے دل پھر بھی مرا دل ہے دل ہی تو زمانا ہے
4
हम इश्क़ के मारों का इतना ही फ़साना है रोने को नहीं कोई हँसने को ज़माना है
ہم عشق کے ماروں کا اتنا ہی فسانا ہے رونے کو نہیں کوئی ہنسنے کو زمانا ہے
5
वो और वफ़ा-दुश्मन मानेंगे न माना है सब दिल की शरारत है आँखों का बहाना है
وہ اور وفا دشمن مانیں گے نہ مانا ہے سب دل کی شرارت ہے آنکھوں کا بہانا ہے
6
शाइ'र हूँ मैं शाइ'र हूँ मेरा ही ज़माना है फ़ितरत मिरा आईना क़ुदरत मिरा शाना है
شاعر ہوں میں شاعر ہوں میرا ہی زمانا ہے فطرت مرا آئینا قدرت مرا شانا ہے
7
जो उन पे गुज़रती है किस ने उसे जाना है अपनी ही मुसीबत है अपना ही फ़साना है
جو ان پہ گزرتی ہے کس نے اسے جانا ہے اپنی ہی مصیبت ہے اپنا ہی فسانا ہے
8
क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है हम ख़ाक-नशीनों की ठोकर में ज़माना है
کیا حسن نے سمجھا ہے کیا عشق نے جانا ہے ہم خاک نشینوں کی ٹھوکر میں زمانا ہے
9
आग़ाज़-ए-मोहब्बत है आना है न जाना है अश्कों की हुकूमत है आहों का ज़माना है
آغاز محبت ہے آنا ہے نہ جانا ہے اشکوں کی حکومت ہے آہوں کا زمانا ہے
10
आँखों में नमी सी है चुप चुप से वो बैठे हैं नाज़ुक सी निगाहों में नाज़ुक सा फ़साना है
آنکھوں میں نمی سی ہے چپ چپ سے وہ بیٹھے ہیں نازک سی نگاہوں میں نازک سا فسانا ہے
11
हम दर्द-ब-दिल नालाँ वो दस्त-ब-दिल हैराँ ऐ इश्क़ तो क्या ज़ालिम तेरा ही ज़माना है
ہم درد بہ دل نالاں وہ دست بہ دل حیراں اے عشق تو کیا ظالم تیرا ہی زمانا ہے
12
या वो थे ख़फ़ा हम से या हम हैं ख़फ़ा उन से कल उन का ज़माना था आज अपना ज़माना है
یا وہ تھے خفا ہم سے یا ہم ہیں خفا ان سے کل ان کا زمانہ تھا آج اپنا زمانا ہے
13
ऐ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा हाँ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा आज एक सितमगर को हँस हँस के रुलाना है
اے عشق جنوں پیشہ ہاں عشق جنوں پیشہ آج ایک ستم گر کو ہنس ہنس کے رلانا ہے
14
थोड़ी सी इजाज़त भी ऐ बज़्म-गह-ए-हस्ती आ निकले हैं दम-भर को रोना है रुलाना है
تھوڑی سی اجازت بھی اے بزم گہ ہستی آ نکلے ہیں دم بھر کو رونا ہے رلانا ہے
15
ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे इक आग का दरिया है और डूब के जाना है
یہ عشق نہیں آساں اتنا ہی سمجھ لیجے اک آگ کا دریا ہے اور ڈوب کے جانا ہے
16
ख़ुद हुस्न-ओ-शबाब उन का क्या कम है रक़ीब अपना जब देखिए अब वो हैं आईना है शाना है
خود حسن و شباب ان کا کیا کم ہے رقیب اپنا جب دیکھیے اب وہ ہیں آئینہ ہے شانا ہے
17
तस्वीर के दो रुख़ हैं जाँ और ग़म-ए-जानाँ इक नक़्श छुपाना है इक नक़्श दिखाना है
تصویر کے دو رخ ہیں جاں اور غم جاناں اک نقش چھپانا ہے اک نقش دکھانا ہے
18
ये हुस्न-ओ-जमाल उन का ये इश्क़-ओ-शबाब अपना जीने की तमन्ना है मरने का ज़माना है
یہ حسن و جمال ان کا یہ عشق و شباب اپنا جینے کی تمنا ہے مرنے کا زمانا ہے
19
मुझ को इसी धुन में है हर लहज़ा बसर करना अब आए वो अब आए लाज़िम उन्हें आना है
مجھ کو اسی دھن میں ہے ہر لحظہ بسر کرنا اب آئے وہ اب آئے لازم انہیں آنا ہے
20
ख़ुद्दारी-ओ-महरूमी महरूमी-ओ-ख़ुद्दारी अब दिल को ख़ुदा रक्खे अब दिल का ज़माना है
خودداری و محرومی محرومی و خودداری اب دل کو خدا رکھے اب دل کا زمانا ہے
21
अश्कों के तबस्सुम में आहों के तरन्नुम में मा'सूम मोहब्बत का मा'सूम फ़साना है
اشکوں کے تبسم میں آہوں کے ترنم میں معصوم محبت کا معصوم فسانا ہے
22
आँसू तो बहुत से हैं आँखों में 'जिगर' लेकिन बंध जाए सो मोती है रह जाए सो दाना है
آنسو تو بہت سے ہیں آنکھوں میں جگرؔ لیکن بندھ جائے سو موتی ہے رہ جائے سو دانا ہے
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