ग़ज़ल
आरज़ू है वफ़ा करे कोई
آرزو ہے وفا کرے کوئی
यह ग़ज़ल प्रेम में लाचारी, वफ़ा की अधूरी तमन्ना और हृदय की बेबसी को बयां करती है। इसमें अत्यंत मार्मिकता से यह भाव दर्शाया गया है कि बीमारी का उपचार तो संभव है, परंतु जब दिल में ही चाहत न हो या कोई टूटने पर आमादा हो, तो कोई उपाय काम नहीं आता।
Source: rekhta · HI
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1
आरज़ू है वफ़ा करे कोई
जी न चाहे तो क्या करे कोई
यह तमन्ना तो होती है कि कोई वफ़ा निभाए, लेकिन अगर किसी का दिल ही न चाहे तो कोई क्या कर सकता है।
2
गर मरज़ हो दवा करे कोई
मरने वाले का क्या करे कोई
अगर कोई बीमारी हो तो कोई उसका इलाज भी करे, लेकिन जो मरने की कगार पर हो उसके लिए कोई क्या कर सकता है?
3
कोसते हैं जले हुए क्या क्या
अपने हक़ में दुआ करे कोई
सताए और जले-भुने लोग न जाने कैसी-कैसी बद्दुआएँ देते हैं; ऐसे में कोई अपने भले के लिए कैसे दुआ माँग सकता है?
4
उन से सब अपनी अपनी कहते हैं
मेरा मतलब अदा करे कोई
सब लोग उनसे अपनी-अपनी बात कहते हैं, काश कोई ऐसा हो जो मेरा मतलब और दिल की बात उन तक पहुँचा सके।
5
चाह से आप को तो नफ़रत है
मुझ को चाहे ख़ुदा करे कोई
आपको तो प्यार और चाहत से नफ़रत है, ख़ुदा करे कि कोई मुझसे मोहब्बत करे।
6
उस गिले को गिला नहीं कहते
गर मज़े का गिला करे कोई
उस शिकायत को शिकायत नहीं कहा जाता, अगर कोई मज़े या आनंद की शिकायत करे।
7
ये मिली दाद रंज-ए-फ़ुर्क़त की
और दिल का कहा करे कोई
जुदाई के दर्द का मुझे यह सिला मिला है, अब इसके बाद कोई और अपने दिल के कहने पर चलकर देख ले।
8
तुम सरापा हो सूरत-ए-तस्वीर
तुम से फिर बात क्या करे कोई
तुम सिर से पैर तक बिल्कुल एक तस्वीर की तरह हो, फिर कोई तुमसे बात कैसे करे?
9
कहते हैं हम नहीं ख़ुदा-ए-करीम
क्यूँ हमारी ख़ता करे कोई
हम यह दावा नहीं करते कि हम दयालु और क्षमाशील ईश्वर हैं, फिर कोई हमारे प्रति कोई भूल या गुनाह क्यों करे?
10
जिस में लाखों बरस की हूरें हों
ऐसी जन्नत को क्या करे कोई
जिस स्वर्ग में लाखों वर्ष पुरानी हूरें हों, कोई ऐसे स्वर्ग का भला क्या करे?
11
इस जफ़ा पर तुम्हें तमन्ना है
कि मिरी इल्तिजा करे कोई
इतने ज़ुल्म और सितम के बावजूद तुम्हारी यह ख़्वाहिश है कि कोई मेरी तरफ़ से आकर तुमसे मिन्नत करे।
12
मुँह लगाते ही 'दाग़' इतराया
लुत्फ़ है फिर जफ़ा करे कोई
थोड़ी तवज्जो मिलते ही 'दाग़' इतराने और घमंड करने लगा, अब मज़ा इसी में है कि कोई उसके साथ फिर से सितम और बेरुखी करे।
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