गर मरज़ हो दवा करे कोई मरने वाले का क्या करे कोई

“If it were an illness, one could seek a cure; but for one destined to die, what can anyone do?”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

अगर कोई बीमारी हो तो कोई उसका इलाज भी करे, लेकिन जो मरने की कगार पर हो उसके लिए कोई क्या कर सकता है?

विस्तार

यह शेर दिल की उस बेबसी को बयां करता है जहाँ दर्द किसी जिस्मानी बीमारी से कहीं आगे निकल चुका है। अगर कोई मामूली मर्ज़ हो तो दवा और हकीम काम आ सकते हैं, लेकिन जब रूह ही हिज्र या ग़म में घुटकर दम तोड़ने लगे, तो कोई क्या कर सकता है? यहाँ शायर ने लाचारी और मोहब्बत के उस ला-इलाज दर्द को बड़ी सादगी से पेश किया है जो इंसान को अंदर ही अंदर ख़त्म कर देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.