तुम सरापा हो सूरत-ए-तस्वीर तुम से फिर बात क्या करे कोई

“You are, from head to toe, the very likeness of a portrait; how, then, could anyone ever speak with you?”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

तुम सिर से पैर तक बिल्कुल एक तस्वीर की तरह हो, फिर कोई तुमसे बात कैसे करे?

विस्तार

इस शेर में शायर महबूब के हुस्न की तुलना एक बेमिसाल तस्वीर से कर रहा है, जो सिर से पांव तक सिर्फ़ मुकम्मल खूबसूरती है। मगर तस्वीर का सच यह भी है कि वह बोलती नहीं, बस खामोश रहती है। शायर बड़ी नज़ाकत से कहता है कि आप इतने लाजवाब हैं कि आपको देखकर ज़बान बंद हो जाती है, और दूसरा यह शिकवा भी है कि आपके इस पथराई खामोशी के आगे भला कोई बात कैसे करे।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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