ग़ज़ल
इस महीना भर कहाँ था साक़िया अच्छी तरह
اس مہینہ بھر کہاں تھا ساقیا اچھی طرح
इस ग़ज़ल में रमज़ान के बाद ईद के मौके पर साक़ी से मिलन का उल्लास और मान-मनुहार बड़े ख़ूबसूरत अंदाज़ में पेश किया गया है। इसके साथ ही, कारवाँ की घंटी की आवाज़ के ज़रिए सफ़र, जुदाई और ज़िन्दगी की नश्वरता का संजीदा अहसास भी बयां होता है।
Source: rekhta · HI
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1
इस महीना भर कहाँ था साक़िया अच्छी तरह
आ इधर आ ईद तो मिल लें ज़रा अच्छी तरह
ऐ साक़ी, तू इस पूरे महीने कहाँ रहा? इधर आ ताकि हम ईद पर अच्छी तरह गले मिल सकें।
2
उँगलियाँ कानों में रख कर ऐ मुसाफ़िर सुन ज़रा
आ रही है साफ़ आवाज़-ए-दरा अच्छी तरह
ऐ मुसाफ़िर, ज़रा कानों में उँगलियाँ रखकर ध्यान से सुन, क़ाफ़िले की घंटी की आवाज़ बिल्कुल साफ़ सुनाई दे रही है।
3
चश्म-ए-मूसा ला सकी इक उस के जल्वे की न ताब
चश्म-ए-दिल से जिस को देखा बार-हा अच्छी तरह
हज़रत मूसा की आँख उसके केवल एक जल्वे की चमक भी सहन न कर सकी, जबकि मैंने उसी को अपने दिल की आँख से कई बार भली-भाँति देखा है।
4
फ़ासला ऐसा नहीं कुछ अर्श की ज़ंजीर से
क्या कहूँ बढ़ता नहीं दस्त-ए-दुआ अच्छी तरह
अर्श की ज़ंजीर से कोई ख़ास दूरी नहीं है, मगर क्या कहूँ कि दुआ के लिए मेरा हाथ ही ठीक तरह से आगे नहीं बढ़ता।
5
अहल-ए-सूरत को नहीं है अच्छी सीरत से ग़रज़
अच्छी सूरत चाहिए अच्छी अदा अच्छी तरह
बाहरी सुंदरता को चाहने वालों को अच्छे चरित्र से कोई मतलब नहीं होता, उन्हें बस खूबसूरत चेहरा और दिलकश अदाएं ही पूरी तरह चाहिए होती हैं।
6
शाहिदान-ए-लाला-ओ-गुल की ख़बर लाई है कुछ
साल भर के ब'अद आई ऐ सबा अच्छी तरह
ऐ सुबह की हवा, तुम पूरे एक साल बाद अच्छी तरह आई हो; क्या तुम लाला और गुलाब जैसे ख़ूबसूरत फूलों की कोई ख़बर लाई हो?
7
सीख लेगी बल की लेना ता-कमर आने तो दो
बल अभी करती नहीं ज़ुल्फ़-ए-दोता अच्छी तरह
इन दोहरी ज़ुल्फ़ों को ज़रा कमर तक तो लंबा होने दो, फिर ये बल खाना सीख लेंगी; अभी ये ठीक से मुड़ना और बल खाना नहीं जानती हैं।
8
शीशा-ओ-जाम-ओ-सुबू भर ले मय-ए-गुल-रंग से
आज साक़ी घिर के आई है घटा अच्छी तरह
हे साक़ी, सुराही, जाम और घड़े को गुलाबी रंग की शराब से भर ले, क्योंकि आज आसमान में घटाएँ अच्छी तरह घिर कर आई हैं।
9
लेते हैं अहल-ए-जुनूँ क्या क्या तसव्वुर के मज़े
आँख से परियों को देखा बार-हा अच्छी तरह
दीवाने लोग अपनी कल्पना के क्या-क्या आनंद लेते हैं, उन्होंने कई बार परियों को अपनी आँखों से साक्षात और भली-भाँति देखा है।
10
दे रही है उस की ख़ामोशी सदा-ए-दूर-बाश
ये नहीं कहता कि 'नज़्म'-ए-मुब्तला अच्छी तरह
उसकी ख़ामोशी दूर रहने की चेतावनी दे रही है, और मैं यह नहीं कहता कि मुसीबत में मुब्तला 'नज़्म' अच्छी हालत में है।
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