“Stop your ears with your fingers, O traveler, and listen well: clear and distinct rings the toll of the caravan's bell.”
ऐ मुसाफ़िर, ज़रा कानों में उँगलियाँ रखकर ध्यान से सुन, क़ाफ़िले की घंटी की आवाज़ बिल्कुल साफ़ सुनाई दे रही है।
पहली नज़र में यह बात अजीब लग सकती है कि कानों में उँगलियाँ डालकर कोई आवाज़ कैसे सुन सकता है। लेकिन शायर यहाँ ज़िंदगी का एक गहरा राज़ समझा रहा है—दुनिया के बाहरी शोर-शराबे को बंद किए बिना दिल और रूह की पुकार नहीं सुनी जा सकती। 'आवाज़-ए-दरा' यानी कारवाँ की घंटी, ज़िंदगी के गुज़रते हुए वक़्त और रवानगी का इशारा है, जो मुसाफ़िर को याद दिलाती है कि अब बाहरी दुनिया से ध्यान हटाकर अपनी असली मंज़िल की ओर देखने का वक़्त आ गया है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
