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शायर

नज़्म तबातबाई

نظم طباطبائی
Urdu1852–1933HyderabadGhazalNazm
26
ग़ज़लें
26
कुल रचनाएं
ैयद अली हैदर नज़्म तबातबाई 19वीं और 20वीं सदी के एक प्रतिष्ठित उर्दू शायर, अनुवादक और आलोचक थे। लखनऊ में जन्मे तबातबाई बाद में हैदराबाद में बस गए, जहाँ उन्होंने निज़ाम कॉलेज में अध्यापन किया और साहित्यिक हलकों में विशिष्ट पहचान बनाई। उन्हें उनकी विचारोत्तेजक ग़ज़लों, आधुनिक नज़्मों और मिर्ज़ा ग़ालिब के दीवान की प्रामाणिक व्याख्या के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है।
प्रमुख रचनाएं

उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में थॉमस ग्रे की अंग्रेज़ी कविता का काव्यात्मक अनुवाद 'गोर-ए-ग़रीबाँ' शामिल है, जिसे उर्दू साहित्य का मील का पत्थर माना जाता है। आलोचना के क्षेत्र में उनकी पुस्तक 'शर्ह-ए-दीवान-ए-ग़ालिब' ग़ालिब के कलाम को समझने के लिए अत्यंत प्रामाणिक मानी जाती है। उनका संकलन 'कुल्लियात-ए-नज़्म' शास्त्रीय ग़ज़लों और विचारशील नज़्मों का अनूठा संग्रह है।

शैली

उनकी शायरी में लखनऊ की भाषाई शुद्धता और दार्शनिक गंभीरता का संतुलित संगम दिखाई देता है। उन्होंने शास्त्रीय उर्दू बहरों को बनाए रखते हुए पश्चिमी साहित्य के तत्वों को सहजता से आत्मसात किया। उनके शेरों में भाषा का अनुशासन, विचारोत्तेजक प्रतीक और परिष्कृत अभिव्यक्ति प्रमुख हैं।

सम्मान

उन्हें हैदराबाद के निज़ाम कॉलेज और उस्मानिया विश्वविद्यालय के साहित्यिक वृत्त में सर्वोच्च सम्मान प्राप्त था। उर्दू आलोचना और अनुवाद विधा में उनके अद्वितीय योगदान को उपमहाद्वीप के विद्वानों द्वारा आज भी अत्यंत आदर के साथ याद किया जाता है।

ग़ज़लें
संग्रह
आ गया फिर रमज़ाँ क्या होगा
अभी गीत नहीं
→
आ के मुझ तक कश्ती-ए-मय साक़िया उल्टी फिरी
अभी गीत नहीं
→
बिदअ'त मस्नून हो गई है
अभी गीत नहीं
→
एहसान ले न हिम्मत-ए-मर्दाना छोड़ कर
अभी गीत नहीं
→
हँसी में वो बात मैं ने कह दी कि रह गए आप दंग हो कर
अभी गीत नहीं
→
इस महीना भर कहाँ था साक़िया अच्छी तरह
अभी गीत नहीं
→
इस वास्ते अदम की मंज़िल को ढूँडते हैं
अभी गीत नहीं
→
जुनूँ के वलवले जब घुट गए दिल में निहाँ हो कर
अभी गीत नहीं
→
किसी से बस कि उमीद-ए-कुशूद-ए-कार नहीं
अभी गीत नहीं
→
किस लिए फिरते हैं ये शम्स ओ क़मर दोनों साथ
अभी गीत नहीं
→
कोई मय दे या न दे हम रिंद-ए-बे-पर्वा हैं आप
अभी गीत नहीं
→
क्या कारवान-ए-हस्ती गुज़रा रवा-रवी में
अभी गीत नहीं
→
क्या कहें किस से प्यार कर बैठे
अभी गीत नहीं
→
मुझ को समझो यादगार-ए-रफ़्तगान-ए-लखनऊ
अभी गीत नहीं
→
नदामत है बना कर इस चमन में आशियाँ मुझ को
अभी गीत नहीं
→
फिरी हुई मिरी आँखें हैं तेग़-ज़न की तरफ़
अभी गीत नहीं
→
पुर्सिश जो होगी तुझ से जल्लाद क्या करेगा
अभी गीत नहीं
→
संग-ए-जफ़ा का ग़म नहीं दस्त-ए-तलब का डर नहीं
अभी गीत नहीं
→
सुब्हा है ज़ुन्नार क्यूँ कैसी कही
अभी गीत नहीं
→
तन्हा नहीं हूँ गर दिल-ए-दीवाना साथ है
अभी गीत नहीं
→
उड़ा कर काग शीशे से मय-ए-गुल-गूँ निकलती है
अभी गीत नहीं
→
ये आह-ए-बे-असर क्या हो ये नख़्ल-ए-बे-समर क्या हो
अभी गीत नहीं
→
ये हुआ मआल हुबाब का जो हवा में भर के उभर गया
अभी गीत नहीं
→
यूँ मैं सीधा गया वहशत में बयाबाँ की तरफ़
अभी गीत नहीं
→
यूँ तो न तेरे जिस्म में हैं ज़ीनहार हाथ
अभी गीत नहीं
→
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