ग़ज़ल

यूँ मैं सीधा गया वहशत में बयाबाँ की तरफ़

یوں میں سیدھا گیا وحشت میں بیاباں کی طرف
नज़्म तबातबाई· Ghazal· 8 shers· radif: की तरफ़

यह ग़ज़ल प्रेम की बेपनाह वहशत और गहरे आंतरिक दर्द को दर्शाती है, जहाँ व्याकुल प्रेमी बेबसी के आलम में वीराने की ओर भागता है। इसमें दिल में अचानक उठने वाले ग़म के तूफ़ान और बहते आँसुओं के ज़रिये विरह की चरम तड़प का मार्मिक चित्रण किया गया है।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
यूँ मैं सीधा गया वहशत में बयाबाँ की तरफ़ हाथ जिस तरह से आता है गरेबाँ की तरफ़
2
बैठे बैठे दिल-ए-ग़म-गीं को ये क्या लहर आई उठ के तूफ़ान चला दीदा-ए-गिर्यां की तरफ़
3
देखना लाला-ए-ख़ुद-रौ का लहकना साक़ी कोह से दौड़ गई आग बयाबाँ की तरफ़
4
रो दिया देख के अक्सर मैं बहार-ए-शबनम हँस दिया देख के अक्सर गुल-ए-ख़ंदाँ की तरफ़
5
बात छुपती नहीं पड़ती हैं निगाहें सब की उस के दामन की तरफ़ मेरे गरेबाँ की तरफ़
6
सैकड़ों दाग़-ए-गुनह धो गए रहमत से तिरी क्या घटा झूम के आई थी गुलिस्ताँ की तरफ़
7
चश्म-ए-आईना परेशाँ-नज़री सीख गई देखता था ये बहुत ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ की तरफ़
8
सर झुकाए हुए है 'नज़्म' बसान-ए-ख़ामा सम्त सज्दे की है तेरी ख़त-ए-फ़रमाँ की तरफ़
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यूँ मैं सीधा गया वहशत में बयाबाँ की तरफ़ | Sukhan AI