ग़ज़ल

बिदअ'त मस्नून हो गई है

بدعت مسنون ہو گئی ہے
नज़्म तबातबाई· Ghazal· 9 shers· radif: हो गई है

यह ग़ज़ल समाज में फैली धार्मिक पाखंड, खोखलेपन और कुरीतियों के सामान्यीकरण पर एक तीखा और व्यंग्यात्मक प्रहार है। शायर ज़ाहिद की निष्प्रभावी इबादत और उम्मत के नैतिक पतन को रेखांकित करते हुए आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता पर बल देता है।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
बिदअ'त मस्नून हो गई है उम्मत मतऊन हो गई है
धर्म में नए मनगढ़ंत तौर-तरीके (बिदअत) परंपरा मान लिए गए हैं और पूरी उम्मत बदनाम व लांछित हो चुकी है।
2
क्या कहना तिरी दुआ का ज़ाहिद गर्दूं का सुतून हो गई है
हे तपस्वी, तुम्हारी दुआ का क्या कहना! वह आसमान को थामने वाला एक खंभा बन गई है।
3
रहने दो अजल जो घात में है मुझ पर मफ़्तून हो गई है
अगर मौत घात लगाए बैठी है तो उसे रहने दो; वह मुझ पर मोहित (फ़िदा) हो गई है।
4
हसरत को ग़ुबार-ए-दिल में ढूँडो ज़िंदा मदफ़ून हो गई है
हसरत को दिल की धूल में ढूँढो, क्योंकि वह ज़िंदा ही दफ़न हो चुकी है।
5
वहशत का था नाम अव्वल अव्वल अब तो वो जुनून हो गई है
शुरुआत में इसे केवल वहशत (बेचैनी या घबराहट) कहा जाता था, लेकिन अब यह बढ़कर मुकम्मल जुनून और दीवानगी बन चुकी है।
6
वाइज़ ने बुरी नज़र से देखा मय शीशे में ख़ून हो गई है
उपदेशक (वाइज़) ने शराब को ऐसी बुरी नज़र से देखा कि बोतल के अंदर मौजूद शराब ख़ून बन गई।
7
आरिज़ के क़रीन गुलाब का फूल हम-रंग की दून हो गई है
गाल के पास गुलाब का फूल आ जाने से दोनों के एक ही रंग का प्रभाव अब दोगुना हो गया है।
8
बंदा हूँ तिरा ज़बान-ए-शीरीं दुनिया मम्नून हो गई है
हे मीठी वाणी वाले, मैं तुम्हारा सेवक हूँ और पूरी दुनिया तुम्हारी अहसानमंद हो गई है।
9
'हैदर' शब-ए-ग़म में मर्ग-ए-नागाह शादी का शुगून हो गई है
हैदर कहते हैं कि दुख की रात में अचानक आने वाली मौत अब एक ख़ुशी और उत्सव के शुभ शगुन जैसी बन गई है।
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बिदअ'त मस्नून हो गई है | Sukhan AI