ग़ज़ल

शौक़ है तो है उस का घर नज़दीक

शौक़ है तो है उस का घर नज़दीक

यह ग़ज़ल बताती है कि यदि कोई सच्चा शौक या प्रेम है, तो वह प्रियजन का घर हमेशा नज़दीक ही महसूस होता है। यह एहसास कि प्रेम की निकटता दूरी से भी ज़्यादा है, और दिल की बात हमेशा पास ही रहती है।

गीत सुनें

शेर दर शेर अर्थ

लिपि व अर्थ
1
शौक़ है तो है उस का घर नज़दीक दूरी-ए-रह है राहबर नज़दीक
अगर किसी की इच्छा या चाहत है, तो उसका घर पास है; लेकिन जो राह (रास्ता) है और जो राह दिखाने वाला (मार्गदर्शक) है, वह दूर है।
2
आह करने में दम को साधे रह कहते हैं दिल से है जिगर नज़दीक
आह करने में दम को साधे रखना, वे कहते हैं कि जिगर दिल के बहुत नज़दीक है।
3
दूर वालों को भी न पहुँचे हम यही न तुम से हैं मगर नज़दीक
शायर कह रहा है कि वह दूर रहने वाले लोगों तक भी नहीं पहुँचता, लेकिन तुम (जो पास हो) उससे भी ज़्यादा दूर हो।
4
डूबें दरिया-ओ-कोह-ओ-शहर-ओ-दश्त तुझ से सब कुछ है चश्म-ए-तर नज़दीक
शायर कहता है कि मेरे प्रिय, सब कुछ—नदी, पहाड़, शहर और रेगिस्तान—तुम्हारी दृष्टि के करीब है।
5
हर्फ़ दूरी है गरचे इंशा लेक दीजो ख़त जा के नामा-बर नज़दीक
अगर अक्षर दूर हैं, भले ही वे झील में हों, तो एक ऐसा ख़त भेजो जो नाम को पास लाए।
6
दूर अब बैठते हैं मज्लिस में हम जो तुम से थे बेशतर नज़दीक
अब हम महफ़िल में दूर बैठते हैं, जबकि हम पहले तुमसे दिल से भी ज़्यादा नज़दीक थे।
7
ख़बर आती है सो भी दूर से याँ आओ यक-बार बे-ख़बर नज़दीक
खबर आती है सो भी दूर से याँ, का अर्थ है कि चाहे खबर कहीं से भी आए, आओ एक बार बे-ख़बर नज़दीक।
8
तोशा-ए-आख़िरत का फ़िक्र रहे जी से जाने का है सफ़र नज़दीक
अर्थ यह है कि मृत्यु के बाद के जीवन (परलोक) का विचार मन में है, क्योंकि जीवन छोड़ने की यात्रा नज़दीक आ गई है।
9
दौर फिरने का हम से वक़्त गया पूछ कुछ हाल बैठ कर नज़दीक
दौर फिरने का हम से वक़्त गया, यानी हमारे लिए घूमना या समय बिताना का समय बीत चुका है। इसलिए, आप पास बैठकर मेरी हालत पूछिए।
10
मर भी रह 'मीर' शब बहुत रोया है मिरी जान अब सहर नज़दीक
हे मीर, मृत्यु में भी मैं बहुत रोया; मेरी जान अब सहर के करीब है।
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