दूर अब बैठते हैं मज्लिस में — मीर तक़ी मीर
दूर अब बैठते हैं मज्लिस में
हम जो तुम से थे बेशतर नज़दीक
“Now we sit in the gathering, far apart, Though we were once closer than the heart.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अब हम महफ़िल में दूर बैठते हैं, जबकि हम पहले तुमसे दिल से भी ज़्यादा नज़दीक थे।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब की शायरी में दूरी के दर्द को बयां करता है। शायर बता रहे हैं कि आज हम महफ़िल में भले ही एक-दूसरे के आस-पास बैठते हैं, लेकिन दिल से हम पहले जितने नज़दीक नहीं हैं। यह सिर्फ़ शारीरिक दूरी नहीं है, बल्कि वो एहसास है कि वक़्त ने रिश्तों की गर्माहट को कहीं पीछे छोड़ दिया है। एक बहुत ही दिल को छू लेने वाली बात है!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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