ग़ज़ल
झुमके दिखा के तूर को जिन ने जला दिया
झुमके दिखा के तूर को जिन ने जला दिया
यह ग़ज़ल एक ऐसे प्रेम प्रसंग का वर्णन करती है जिसमें एक नर्तकी (या महबूबा) के मनमोहक नज़ारों ने तूर पर्वत पर खड़े प्रेमियों (या प्रेम के प्रतीक) को जला दिया। इसमें इश्क़ के फ़ितने और वियोग के दर्द को दर्शाया गया है, जहाँ महबूब की अदाओं ने वक़्त और शांति को भंग कर दिया है।
गीत सुनें
1
झुमके दिखा के तूर को जिन ने जला दिया
आई क़यामत उन ने जो पर्दा उठा दिया
झुमके दिखा कर तूर को जिन ने जला दिया, और जब उन ने पर्दा उठा दिया, तो क़यामत आ गई।
2
उस फ़ित्ने को जगा के पशेमाँ हुई नसीम
क्या क्या 'अज़ीज़ लोगों को उन ने सुला दिया
नसीम ने उस फ़ितने को जगा दिया और पछताया, कि 'अज़ीज़ लोगों को उन्होंने सुला दिया।
3
अब भी दिमाग़-ए-रफ़्ता हमारा है 'अर्श पर
गो आसमाँ ने ख़ाक में हम को मिला दिया
हे अर्श! जब आसमान ने हमें धूल में मिला दिया, तब भी हमारा मन भटकने वाला है।
4
जानी न क़द्र उस गुहर शब चराग़ की
दिल रेज़ा-ए-ख़ज़फ़ की तरह मैं उठा दिया
हे मन, मैंने उस रत्न-जैसे दीपक का मोल नहीं जाना; मैंने उसे टूटे बर्तन की तरह उठा दिया।
5
तक़्सीर जान देने में हम ने कभू न की
जब तेग़ वो बुलंद हुई सर झुका दिया
अपमान या निंदा में हमने कभी जान देने का काम नहीं किया, जब भी तलवार ऊँची हुई, हमने सिर झुका दिया।
6
गर्मी चराग़ की सी नहीं वो मिज़ाज में
अब दिल फ़सुर्दगी से हूँ जैसे बुझा दिया
शायर कह रहा है कि उसका मिज़ाज किसी दीपक की लौ जैसा नहीं है, और अब उसका दिल पूरी तरह से बुझा हुआ है।
7
वो आग हो रहा है ख़ुदा जाने ग़ैर ने
मेरी तरफ़ से उस के तईं क्या लगा दिया
वो आग हो रहा है ख़ुदा जाने ग़ैर ने, मेरी तरफ़ से उस के तईं क्या लगा दिया। (अर्थात: क्या यह आग है, यह तो ख़ुदा जाने, ग़ैर ने मेरी तरफ से उस पर क्या लगा दिया।)
8
इतना कहा था फ़र्श तिरी रह के हम हों काश
सो तू ने मार मार के आ कर बिछा दिया
इतना कहा था कि अगर तुम यहाँ रहोगी तो हम ऐसे होंगे, पर तुमने आकर उसे चोट पहुँचाकर बिछा दिया।
9
अब घटते घटते जान में ताक़त नहीं रही
टक लग चली सबा कि दिया सा बढ़ा दिया
मेरा जीवन घटता जा रहा है और उसमें कोई शक्ति शेष नहीं है, लेकिन सुबह की हवा ऐसे चली जैसे उसने एक दीपक का प्रकाश बढ़ा दिया हो।
10
तंगी लगा है करने दम अपना भी हर घड़ी
कुढ़ने ने दिल के जी को हमारे खपा दिया
हर पल मैं अपनी साँस लगाने में संघर्ष करता हूँ, क्योंकि दिल के उत्साह को कड़वाहट ने थका दिया है।
11
की चश्म तू ने बाज़ कि खोला दर-ए-सितम
किस मुद्दई' ख़ल्क़ ने तुझ को जगा दिया
तूने किस तरह से ज़ुल्म के दरवाज़े पर एक खुला घाव कर दिया? किस दावे या हक़ से पूरी सृष्टि ने तुझे जगाया?
12
क्या क्या ज़ियान 'मीर' ने खींचे हैं 'इश्क़ में
दिल हाथ से दिया है जुदा सर जुदा दिया
मीर ने इश्क़ में क्या-क्या धागे बुने हैं, यह बात कहने के लिए मैंने अपना दिल हाथ से अलग कर दिया और अपना सिर भी अलग कर दिया।
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