उस फ़ित्ने को जगा के पशेमाँ हुई नसीम — मीर तक़ी मीर

उस फ़ित्ने को जगा के पशेमाँ हुई नसीम क्या क्या 'अज़ीज़ लोगों को उन ने सुला दिया

“The breeze, having awakened that tribulation, grew regretful, What wonderful people they put to sleep.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

नसीम ने उस फ़ितने को जगा दिया और पछताया, कि 'अज़ीज़ लोगों को उन्होंने सुला दिया।

विस्तार

यह शेर उस दर्द को बयान करता है जब किसी के ज़हन में कोई फ़ितना या बेचैनी पैदा होती है। शायर कहते हैं कि जैसे हवा का झोंका (नसीम) एक हंगामा खड़ा करके पछताता है, वैसे ही दुनिया की बातें और तकरारें होती रहती हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि प्यारे लोग... वे तो किसी चीज़ से बेखबर, गहरी नींद में सोए हुए हैं। यह विरह और बेख़बरी का एहसास है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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