तक़्सीर जान देने में हम ने कभू न की — मीर तक़ी मीर

तक़्सीर जान देने में हम ने कभू न की जब तेग़ वो बुलंद हुई सर झुका दिया

“Never did we make the deed of giving up one's life in slander, When the spear was high, we lowered our heads.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

अपमान या निंदा में हमने कभी जान देने का काम नहीं किया, जब भी तलवार ऊँची हुई, हमने सिर झुका दिया।

विस्तार

यह शेर हमें स्वाभिमान और समर्पण की बात कहता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि हमने कभी सिर्फ़ अपमान के कारण जान नहीं दी। असली समर्पण तब हुआ जब चुनौती—यानी वह तेग़—इतनी ऊँची उठ गई कि झुकना पड़ गया। यह केवल अपमान की बात नहीं है, बल्कि उस चुनौती की विशालता को दर्शाता है, जिसने हमें झुकने पर मजबूर कर दिया।

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