गर्मी चराग़ की सी नहीं वो मिज़ाज में — मीर तक़ी मीर

गर्मी चराग़ की सी नहीं वो मिज़ाज में अब दिल फ़सुर्दगी से हूँ जैसे बुझा दिया

“Her temperament is not like a lamp's flame,”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

शायर कह रहा है कि उसका मिज़ाज किसी दीपक की लौ जैसा नहीं है, और अब उसका दिल पूरी तरह से बुझा हुआ है।

विस्तार

यह शेर एक गहरे भावनात्मक टूटन को बयान करता है। शायर कह रहे हैं कि महबूब का मिज़ाज किसी जलते हुए दीये की तरह गर्म नहीं है। इस अचानक आई ठंडक की वजह से, शायर का दिल भी बुझ गया है, जैसे कोई दीया बुझ जाता है। यह एहसास कि जो गरमाहट आप उम्मीद कर रहे थे, वह कहीं नहीं है, बहुत दर्दनाक होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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