की चश्म तू ने बाज़ कि खोला दर-ए-सितम — मीर तक़ी मीर
“What kind of open wound did you create at the door of oppression? By what claim did creation awaken you?”
अर्थ
तूने किस तरह से ज़ुल्म के दरवाज़े पर एक खुला घाव कर दिया? किस दावे या हक़ से पूरी सृष्टि ने तुझे जगाया?
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर की शायरी का एक बहुत गहरा नज़रिया है। शायर पूछ रहे हैं कि आपने ये सताने का दरवाज़ा क्यों खोला? ये सवाल सिर्फ़ दर्द का नहीं है, बल्कि ये इस बात पर सवाल उठाता है कि आपका ये दर्द कहाँ से आया। ऐसा लगता है जैसे शायर कह रहे हैं कि आपकी ये तड़प, ये बेचैनी, किसी साधारण वजह से नहीं है, बल्कि किसी दैवीय या रहस्यमयी कारण से है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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