ग़ज़ल

हम हैं मजरूह माजरा है ये

हम हैं मजरूह माजरा है ये

यह ग़ज़ल इश्क़ के दर्द और ज़िंदगी के उतार-चढ़ावों को बयां करती है। इसमें वक्ता बताता है कि वह एक जख्मी है, लेकिन यह हालात भी एक तरह का मज़ा हैं। वह बताता है कि इश्क़ की शुरुआत में जो आग थी, वह अब ख़ाक हो चुकी है, लेकिन यह अंत भी एक तरह का नज़ारा है।

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शेर दर शेर अर्थ

लिपि व अर्थ
1
हम हैं मजरूह माजरा है ये वो नमक छिड़के है मज़ा है ये
हम घायल हैं और यह हमारी नियति है; / यह मज़ा है कि वे नमक छिड़कते हैं।
2
आग थे इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम अब जो हैं ख़ाक इंतिहा है ये
इश्क़ की शुरुआत में हम आग थे, और अब जो ख़ाक हैं, यह उसका अंत है।
3
बूद आदम नुमूद शबनम है एक दो दम में फिर हुआ है ये
बूद आदम नुमूद शबनम है, एक दो दम में फिर हुआ है ये। इसका अर्थ है कि यह चीज़ आदम के चेहरे पर पड़ी ओस की तरह है, जो पल भर में हो जाती है।
4
शुक्र उस की जफ़ा का हो न सका दिल से अपने हमें गिला है ये
शुक्र उस व्यक्ति की क्रूरता का सामना नहीं कर सका, पर हमें अपने दिल से शिकायत है।
5
शोर से अपने हश्र है पर्दा यूँ नहीं जानता कि क्या है ये
शोर से अपने हश्र का पर्दा है, यूँ नहीं जानता कि क्या है ये।
6
बस हुआ नाज़ हो चुका अग़माज़ हर घड़ी हम से क्या अदा है ये
बस हुआ नाज़ हो चुका अग़माज़, हर घड़ी हम से क्या अदा है ये। इसका शाब्दिक अर्थ है कि मेरे घमंड या अभिमान का बहुत अधिक हो जाना है, और हर पल आप हमसे क्या खूबसूरती या नज़ाकत का प्रदर्शन करती हैं।
7
नाशें उठती हैं आज यारों की आन बैठो तो ख़ुशनुमा है ये
आज यारों के मन में निराशाएं जाग उठी हैं, लेकिन जब आप बैठते हैं तो सब कुछ आनंदमय हो जाता है।
8
देख बे-दम मुझे लगा कहने है तो मुर्दा सा पर बला है ये
हे बे-दम, मुझे लगा कि यह बात कहने से यह मुर्दा जैसा है, पर यह एक वरदान है।
9
मैं तो चुप हूँ वो होंट चाटे है क्या कहूँ रीझने की जा है ये
मैं तो चुप हूँ, पर वे होंठ चाट रहे हैं; क्या कहूँ, यह तो मन को रिझाने का जाल है।
10
है रे बेगानगी कभू उन ने न कहा ये कि आश्ना है ये
शायर कह रहा है कि उन्होंने कभी भी मुझे यह नहीं बताया कि यह सब एक मात्र भ्रम था।
11
तेग़ पर हाथ दम-ब-दम कब तक इक लगा चक कि मुद्द'आ है ये
तेग़ पर हाथ दम-ब-दम कब तक, इक लगा चक कि मुद्द'आ है ये। इसका अर्थ है कि तलवार पर हाथ हर पल तक क्यों रखा जाए; यह तो बस एक क्षणिक और व्यर्थ की गुहार है।
12
'मीर' को क्यूँ न मुग़्तनिम जाने अगले लोगों में इक रहा है ये
इसका शाब्दिक अर्थ है कि अवसरवादी व्यक्ति को यह क्यों नहीं पता होना चाहिए कि यह अगली पीढ़ियों में मौजूद है।
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