तेग़ पर हाथ दम-ब-दम कब तक — मीर तक़ी मीर

तेग़ पर हाथ दम-ब-दम कब तक इक लगा चक कि मुद्द'आ है ये

“How long can the hand rest upon the sword, moment by moment? It is merely a desperate plea.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

तेग़ पर हाथ दम-ब-दम कब तक, इक लगा चक कि मुद्द'आ है ये। इसका अर्थ है कि तलवार पर हाथ हर पल तक क्यों रखा जाए; यह तो बस एक क्षणिक और व्यर्थ की गुहार है।

विस्तार

यह शेर जीवन की उन अपेक्षाओं पर सवाल उठाता है जो हमें हमेशा तैयार रहने को कहती हैं। शायर कहते हैं कि तलवार पर हाथ रखना, यानी हमेशा संघर्ष के लिए तैयार रहना, बहुत थकाऊ है। ये सारी मांगें, ये सारी तैयारी... ये तो बस एक पल की गुज़ारिश है, जो क्षण भर में गुज़र जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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