बस हुआ नाज़ हो चुका अग़माज़ — मीर तक़ी मीर

बस हुआ नाज़ हो चुका अग़माज़ हर घड़ी हम से क्या अदा है ये

“My conceit has grown too strong, O radiant beauty, What grace is this that you bestow upon us every moment?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

बस हुआ नाज़ हो चुका अग़माज़, हर घड़ी हम से क्या अदा है ये। इसका शाब्दिक अर्थ है कि मेरे घमंड या अभिमान का बहुत अधिक हो जाना है, और हर पल आप हमसे क्या खूबसूरती या नज़ाकत का प्रदर्शन करती हैं।

विस्तार

यह शेर खूबसूरती और अदा पर एक गहरा आत्म-चिंतन है। मिर्ज़ा तक़ी मीर अपने ही आकर्षण और नज़ाकत पर सवाल उठा रहे हैं। वह कहते हैं कि उनका ये अंदाज़ इतना आदत बन गया है, कि यह एक 'नाज़' जैसा हो गया है। यह एक बहुत ही मार्मिक पल है, जहाँ शायर खुद से पूछते हैं कि यह अदा, यह नज़ाकत, आखिर किस लिए है... क्या यह सहज है या एक दिखावा?

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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