मैं तो चुप हूँ वो होंट चाटे है — मीर तक़ी मीर

मैं तो चुप हूँ वो होंट चाटे है क्या कहूँ रीझने की जा है ये

“I am silent, but those lips are licking; what can I say, this is a lure to entice.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मैं तो चुप हूँ, पर वे होंठ चाट रहे हैं; क्या कहूँ, यह तो मन को रिझाने का जाल है।

विस्तार

यह शेर उस दिल की उलझन को बयान करता है, जो महबूब के आगे बेबस हो जाता है। शायर कहते हैं कि मैं तो चुप हूँ, लेकिन वो होंठ चाट रही है। अब मैं क्या कहूँ? क्योंकि रीझने, नटखट होने का पूरा हुनर तो उसी के पास है। यह एहसास बहुत ही गहरा है—जब महबूब की एक अदा आपको speechless कर दे।

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