ग़ज़ल
मशहूर चमन में तिरी गुल पैरहनी है
मशहूर चमन में तिरी गुल पैरहनी है
यह गज़ल एक महफ़िल में किसी खास प्रिय के सौंदर्य और उसके आकर्षण का वर्णन करती है। शायर कहता है कि उस प्रिय का हर अंग मनमोहक है, और उसका अस्तित्व ही एक अनूठी तड़प है। यह प्रेम की गहराई और उसके द्वारा उत्पन्न किए गए भावुक उथल-पुथल को व्यक्त करती है।
गीत सुनें
1
मशहूर चमन में तिरी गुल पैरहनी है
क़ुर्बां तिरे हर उज़्व पे नाज़ुक-बदनी है
मशहूर चमन में आपकी पोशाक बहुत सुंदर है, और क़ुर्बां, आपके हर अंग पर आपकी नाज़ुक काया है।
2
उर्यानी-ए-आशुफ़्ता कहाँ जाए पस-अज़-मर्ग
कुश्ता है तिरा और यही बे-कफ़नी है
अशुफ़्ता उर्यानी कहाँ जाए मौत के सामने? तुम्हारा वियोग निकट है और यही बिना कफ़न की ज़िंदगी है।
3
समझे है न परवाना न थामे है ज़बाँ शम्अ'
वो सोख़्तनी है तो ये गर्दन-ज़दनी है
क्या आप समझ गए हैं कि परवाना (प्रियतम) ज़ुबान की लौ को नहीं थामे हुए है, और अगर यह मीठी बात है तो यह गर्दन काटने जैसी बात है।
4
लेता ही निकलता है मिरा लख़्त-ए-जिगर अश्क
आँसू नहीं गोया कि ये हीरे की कनी है
जैसे ही यह निकलता है, मेरे दिल का दाग़ आँसू निकल आता है। यह आँसू नहीं है, बल्कि हीरे का एक कण है।
5
बुलबुल की कफ़-ए-ख़ाक भी अब होगी परेशाँ
जामे का तिरे रंग सितमगर चिमनी है
बुलबुल के पंखों पर लगी धूल भी अब बेचैन होगी, और तुम्हारे रंग का प्याला, ऐ क्रूर व्यक्ति, एक धुएँ से भरी चिमनी जैसा है।
6
कुछ तो उभर ऐ सूरत-ए-शीरीं कि दिखाऊँ
फ़रहाद के ज़िम्मे भी अजब कोह-कनी है
ऐ प्यारे मुखड़े, कुछ तो चमक दिखाओ कि मैं दिखा सकूँ; फ़रहाद के ज़िम्मे भी अजीब-सी ऊँची पहाड़ी है।
7
हों गर्म-ए-सफ़र शाम-ए-ग़रीबाँ से ख़ुशी हों
ऐ सुब्ह-ए-वतन तू तो मुझे बे-वतनी है
सफ़र की गर्मी से, परदेसी की शाम को ख़ुशी मिले; ऐ वतन की सुबह, तू तो मुझे बे-वतनपन लगता है।
8
हर-चंद गदा हूँ मैं तिरे इश्क़ में लेकिन
इन बुल-हवसों में कोई मुझ सा भी ग़नी है
हर-चंद गदा हूँ मैं तुम्हारे इश्क़ में, पर इन बुली-हवासों में मुझ जैसा कोई भी ग़नी नहीं।
9
हर अश्क मिरा है दुर-ए-शहवार से बेहतर
हर लख़्त-ए-जिगर रश्क-ए-अक़ीक़-ए-यमनी है
मेरा हर आँसू दूर के शहवार महल से बेहतर है, और मेरे दिल का हर टुकड़ा यमनी पवित्र धागे की ईर्ष्या का कारण है।
10
बिगड़ी है निपट 'मीर' तपिश और जिगर में
शायद कि मिरे जी ही पर अब आन बनी है
मीर कहता है कि तपिश और जिगर दोनों ही बिगड़े हुए हैं, और शायद उसका अपना अस्तित्व ही अब एक बोझ बन गया है।
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