बिगड़ी है निपट 'मीर' तपिश और जिगर में शायद कि मिरे जी ही पर अब आन बनी है

“Oh Meer, both the heat and the heart have been ruined, Perhaps my own existence is now a burden.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

मीर कहता है कि तपिश और जिगर दोनों ही बिगड़े हुए हैं, और शायद उसका अपना अस्तित्व ही अब एक बोझ बन गया है।

विस्तार

यह शेर इश्क़ की उस गहरी, बेचैन करने वाली तपिश को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि उनके दिल में एक ऐसी बेचैनी और जुनून है.... कि उन्हें लगता है, शायद उनके महबूब ने ही उनके लिए एक रुतबा, एक इज़्ज़त बना दी है। यह प्रेम की उस पराकाष्ठा को दिखाता है, जहाँ इश्क़ ही पहचान बन जाता है।

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