ज
शायर

जिगर मुरादाबादी

جگر مرادآبادی
Urdu1890–1960MoradabadGhazal
50
ग़ज़लें
50
कुल रचनाएं
िगर मुरादाबादी (जन्म अली सिकंदर, 1890–1960) बीसवीं सदी के अत्यंत लोकप्रिय और शीर्षस्थ उर्दू ग़ज़लकारों में से एक थे। अपने तरन्नुम और भावुक अंदाज़-ए-बयान के लिए विख्यात जिगर ने शास्त्रीय ग़ज़ल को नई ऊर्जा और ताज़गी प्रदान की। उनकी शायरी में इश्क़ की नफ़ासत, मानवीय संवेदना और रूहानी गहराई का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
प्रमुख रचनाएं

उनके प्रमुख काव्य संग्रहों में 'दाग़-ए-जिगर', 'शोला-ए-तूर' और 'आतिश-ए-गुल' शामिल हैं। उनकी विख्यात ग़ज़लें जैसे 'आदमी आदमी से मिलता है' और 'आँखों का था क़ुसूर न दिल का क़ुसूर था' आज भी अदबी महफ़िलों में बेहद आदर के साथ पढ़ी जाती हैं।

शैली

मुंशी असग़र अली ख़ाँ 'बहर' की शागिर्दी में निखरे जिगर के कलाम में शास्त्रीय शिल्प और सहज संगीतमयता का सुंदर मेल है। उनकी शैली भावनात्मक गहराई, नफ़ीस लहजे और इंसानियत के खुले पैग़ाम के लिए पहचानी जाती है।

सम्मान

उन्हें 1958 में उनके संग्रह 'आतिश-ए-गुल' के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने भी उन्हें मानद डी.लिट्. की उपाधि से नवाज़ा था।

ग़ज़लें
संग्रह
आदमी आदमी से मिलता है
अभी गीत नहीं
→
आज क्या हाल है यारब सर-ए-महफ़िल मेरा
अभी गीत नहीं
→
आँखों का था क़ुसूर न दिल का क़ुसूर था
अभी गीत नहीं
→
आँखों में बस के दिल में समा कर चले गए
अभी गीत नहीं
→
आया न रास नाला-ए-दिल का असर मुझे
अभी गीत नहीं
→
अब तो ये भी नहीं रहा एहसास
अभी गीत नहीं
→
अगर न ज़ोहरा-जबीनों के दरमियाँ गुज़रे
अभी गीत नहीं
→
ऐ हुस्न-ए-यार शर्म ये क्या इंक़लाब है
अभी गीत नहीं
→
अल्लाह अगर तौफ़ीक़ न दे इंसान के बस का काम नहीं
अभी गीत नहीं
→
बराबर से बच कर गुज़र जाने वाले
अभी गीत नहीं
→
बे-कैफ़ दिल है और जिए जा रहा हूँ मैं
अभी गीत नहीं
→
दास्तान-ए-ग़म-ए-दिल उन को सुनाई न गई
अभी गीत नहीं
→
दिल गया रौनक़-ए-हयात गई
अभी गीत नहीं
→
दिल को सुकून रूह को आराम आ गया
अभी गीत नहीं
→
दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं
अभी गीत नहीं
→
दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद
अभी गीत नहीं
→
फ़िक्र-ए-मंज़िल है न होश-ए-जादा-ए-मंज़िल मुझे
अभी गीत नहीं
→
हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं
अभी गीत नहीं
→
इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है
अभी गीत नहीं
→
इश्क़-ए-ला-महदूद जब तक रहनुमा होता नहीं
अभी गीत नहीं
→
इश्क़ को बे-नक़ाब होना था
अभी गीत नहीं
→
इश्क़ में ला-जवाब हैं हम लोग
अभी गीत नहीं
→
जेहल-ए-ख़िरद ने दिन ये दिखाए
अभी गीत नहीं
→
जो अब भी न तकलीफ़ फ़रमाइएगा
अभी गीत नहीं
→
जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं
अभी गीत नहीं
→
काम आख़िर जज़्बा-ए-बे-इख़्तियार आ ही गया
अभी गीत नहीं
→
कसरत में भी वहदत का तमाशा नज़र आया
अभी गीत नहीं
→
किया तअ'ज्जुब कि मिरी रूह-ए-रवाँ तक पहुँचे
अभी गीत नहीं
→
कोई ये कह दे गुलशन गुलशन
अभी गीत नहीं
→
50 में से 30
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