ग़ज़ल

लाखों में इंतिख़ाब के क़ाबिल बना दिया

لاکھوں میں انتخاب کے قابل بنا دیا
जिगर मुरादाबादी· Ghazal· 3 shers· radif: बना दिया

यह ग़ज़ल इश्क़ के चमत्कारी और रूपांतरकारी प्रभाव को उजागर करती है, जहाँ महबूब की एक नज़र साधारण दिल को भी अद्वितीय और प्रतिष्ठित बना देती है। इसमें प्रेम में अपनी बर्बादी को भी गर्व और कृतज्ञता के साथ स्वीकार करने का भाव व्यक्त हुआ है।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
लाखों में इंतिख़ाब के क़ाबिल बना दिया जिस दिल को तुम ने देख लिया दिल बना दिया
तुमने जिस भी दिल पर अपनी नज़र डाली, उसे लाखों में चुने जाने के लायक़ और सचमुच एक सच्चा दिल बना दिया।
2
हर-चंद कर दिया मुझे बर्बाद इश्क़ ने लेकिन उन्हें तो शेफ़्ता-ए-दिल बना दिया
यद्यपि प्रेम ने मुझे पूरी तरह बर्बाद कर दिया, लेकिन इसने कम से कम महबूब को दिल से मेरा दीवाना बना दिया।
3
पहले कहाँ ये नाज़ थे ये इश्वा ओ अदा दिल को दुआएँ दो तुम्हें क़ातिल बना दिया
पहले तुम्हारे अंदर ये नखरे, बनाव-सिंगार और अदाएं कहाँ थीं? तुम्हें तो मेरे दिल को दुआ देनी चाहिए, जिसने तुम्हें क़ातिल बना दिया।
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