ग़ज़ल

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है

ہر ایک بات پہ کہتے ہو تم کہ تُو کیا ہے
मिर्ज़ा ग़ालिब· Ghazal· 10 shers· radif: है

यह ग़ज़ल एक सवाल करती है कि हर बात पर लोग पूछते हैं कि 'तू क्या है'। शायर सवाल करते हैं कि यह बातचीत का अंदाज़, या किसी का दिखावा किस चीज़ का कमाल है। वह पूछते हैं कि यह महज़ ईर्ष्या है, या किसी और चीज़ का डर है, और अंत में अपने अस्तित्व और ज़रूरत के बारे में सवाल करते हैं।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तुगू क्या है
हर बात पर तुम यह कहते हो कि तुम क्या हो, तुम खुद बताओ कि ये बात करने का तरीका क्या है।
2
न शोले में ये करिश्मा न बर्क़ में ये अदा कोई बताओ कि वो शोख़-ए-तुंद-ख़ू क्या है
शोलों के जादू में न बिजली की अदा में, कोई बताए कि वह मदहोश करने वाली सुंदरता क्या है।
3
ये रश्क है कि वो होता है हम-सुख़न तुम से वगर्ना ख़ौफ़-ए-बद-आमोज़ी-ए-अदू क्या है
यह ईर्ष्या है कि आप हमसे बात करते हैं, या यह दुश्मन से सीखे जाने के डर के बारे में है।
4
चिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहन हमारे जैब को अब हाजत-ए-रफ़ू क्या है
शरीर पर लहू से लिपटे कपड़ा चिपका है, अब हमारे जेबों का क्या काम है।
5
जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा कुरेदते हो जो अब राख जुस्तुजू क्या है
जिस शरीर में आग लगी है, वहाँ दिल भी ज़रूर जल गया होगा; तुम अब राख में क्या ढूंढ रहे हो?
6
रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है
हम उन बातों पर विश्वास नहीं करते जो रगों में दौड़ती हैं। अगर यह आँख से न टपके, तो यह रक्त क्या है।
7
वो चीज़ जिस के लिए हम को हो बहिश्त अज़ीज़ सिवाए बादा-ए-गुलफ़ाम-ए-मुश्क-बू क्या है
वह चीज़ जिसके लिए हमें जन्नत प्यारी है, सिवाय फूलों की सुगंधित हवा के और क्या है।
8
पियूँ शराब अगर ख़ुम भी देख लूँ दो-चार ये शीशा ओ क़दह ओ कूज़ा ओ सुबू क्या है
शायर कहता है कि अगर मैं शराब का थोड़ा सा भी नशा देख लूँ, तो ये शीशा, ये क़दह, ये कूज़ा और ये सुबू क्या है।
9
रही न ताक़त-ए-गुफ़्तार और अगर हो भी तो किस उमीद पे कहिए कि आरज़ू क्या है
बोलने की शक्ति बाकी नहीं है, और भले ही हो भी, तो किस उम्मीद पर आप पूछिए कि मेरी इच्छा क्या है।
10
हुआ है शह का मुसाहिब फिरे है इतराता वगर्ना शहर में ग़ालिब की आबरू क्या है
किसी ने शह की तरह व्यवहार किया है और इतराकर घूम रहा है, वरना शहर में शायर की कोई इज़्ज़त क्या है।
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