चिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहन
हमारे जैब को अब हाजत-ए-रफ़ू क्या है
“Blood-stained cloth clings to the body, What use are our pockets for now?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
शरीर पर लहू से लिपटे कपड़ा चिपका है, अब हमारे जेबों का क्या काम है।
विस्तार
यह शेर दर्द और नुकसान की व्यापकता को दर्शाता है। 'लहू से पैराहन' केवल कपड़े नहीं हैं, बल्कि वे गहरे घाव हैं जो आत्मा से चिपके रहते हैं। मिर्ज़ा ग़ालिब कहते हैं कि जब जीवन खून के दाग से सना हो जाता है, तो हमारे जैब में रखे धन या तैयारी का क्या काम है। यह संसार के बंधनों की निरर्थकता पर एक गहरा चिंतन है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
