वो चीज़ जिस के लिए हम को हो बहिश्त अज़ीज़ सिवाए बादा-ए-गुलफ़ाम-ए-मुश्क-बू क्या है

“What treasure, save the fragrant breeze of flowers, is dear to us?”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

वह चीज़ जिसके लिए हमें जन्नत प्यारी है, सिवाय फूलों की सुगंधित हवा के और क्या है।

विस्तार

यह शेर सांसारिक नशीलेपन और जन्नत की हकीकत के बीच एक गहरा सवाल उठाता है। मिर्ज़ा ग़ालिब पूछते हैं कि क्या कोई ऐसी चीज़ है, सिवाए बाग़ की महक और मुश्क-बूदार शराब के, जो हमें जन्नत में भी इतनी प्यारी लगे? यह एहसास दिलाता है कि दुनिया के नज़ारे और ख़ुशबू इतनी मोहक हैं कि वो हमेशा के लिए क़ैद हो जाते हैं!

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