ग़ज़ल

दिल परेशान हुआ जाता है

دل پریشان ہوا جاتا ہے
दाग़ देहलवी· Ghazal· 15 shers· radif: हुआ जाता है

यह ग़ज़ल हृदय की बेचैनी और रूहानी बदलाव की दास्तान बयान करती है। इसमें दिखावटी तक़वे और ज़ाहिद की ज़ाहिरदारी पर तंज़ करते हुए पीर-ए-मुग़ाँ की ख़िदमत और इश्क़-ए-हक़ीक़ी को ही सच्चा इंसान बनने की राह बताया गया है।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
दिल परेशान हुआ जाता है और सामान हुआ जाता है
2
ख़िदमत-ए-पीर-ए-मुग़ाँ कर ज़ाहिद तू अब इंसान हुआ जाता है
3
मौत से पहले मुझे क़त्ल करो उस का एहसान हुआ जाता है
4
लज़्ज़त-ए-इश्क़ इलाही मिट जाए दर्द अरमान हुआ जाता है
5
दम ज़रा लो कि मिरा दम तुम पर अभी क़ुर्बान हुआ जाता है
6
गिर्या क्या ज़ब्त करूँ ऐ नासेह अश्क पैमान हुआ जाता है
7
बेवफ़ाई से भी रफ़्ता रफ़्ता वो मिरी जान हुआ जाता है
8
अर्सा-ए-हश्र में वो आ पहुँचे साफ़ मैदान हुआ जाता है
9
मदद ऐ हिम्मत-ए-दुश्वार-पसंद काम आसान हुआ जाता है
10
छाई जाती है ये वहशत कैसी घर बयाबान हुआ जाता है
11
शिकवा सुन आँख मिला कर ज़ालिम क्यूँ पशेमान हुआ जाता है
12
आतिश-ए-शौक़ बुझी जाती है ख़ाक अरमान हुआ जाता है
13
उज़्र जाने में न कर ऐ क़ासिद तू भी नादान हुआ जाता है
14
मुज़्तरिब क्यूँ न हों अरमाँ दिल में क़ैद मेहमान हुआ जाता है
15
'दाग़' ख़ामोश न लग जाए नज़र शे'र दीवान हुआ जाता है
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दिल परेशान हुआ जाता है | Sukhan AI