“May this sweet savor of love, O God, be erased and cease; for agony itself is turning into a cherished longing.”
हे ईश्वर, प्रेम का यह मज़ा मिट जाए, क्योंकि इसका दर्द ही अब एक चाहत बनता जा रहा है।
इस शेर में शायर मोहब्बत के उस नाज़ुक और अजीब मोड़ पर खड़ा है, जहाँ जुदाई और तड़प का दर्द भी इतना मीठा लगने लगता है कि दिल उसी दर्द की तमन्ना करने लगता है। शायर खुदा से फरियाद कर रहा है कि इश्क का यह लतीफ़ मज़ा खत्म हो जाए, क्योंकि अब दर्द सहना ही जिंदगी का सबसे बड़ा अरमान बनता जा रहा है। यह उस खूबसूरत लाचारी का इज़हार है जहाँ आशिक़ अपनी ही तकलीफ से बेपनाह प्यार करने लगता है।
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