“The heart grows increasingly troubled and distressed, / while preparations for yet more turmoil are addressed.”
दिल लगातार बेचैन और परेशान होता जा रहा है, और अधिक परेशानी का सामान (कारण) तैयार होता जा रहा है।
यह शेर दिल की उस बेबसी को बयां करता है जब वह पहले से ही दर्द और बेचैनी से भरा हो, और हालात कुछ ऐसे बनें कि फिक्र के नए सामान जुटते चले जाएं। यहाँ 'सामान' से मुराद उन तैयारियों या वजहों से है जो उलझन को और बढ़ा रही हैं—जैसे किसी जुदाई के सफर या मोहब्बत की नई आज़माइश का इंतज़ाम हो रहा हो। शायर बड़ी सादगी से समझाता है कि जब दिल अंदर से घबराने लगे, तो बाहर की दुनिया उस पर और बोझ लादने से बाज़ नहीं आती।
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