“Hush now, Dāgh, lest the evil eye be cast; a single verse is swelling into an entire anthology at last.”
ऐ दाग़, अब ख़ामोश हो जाओ ताकि किसी की बुरी नज़र न लग जाए, क्योंकि तुम्हारा एक ही शे'र अब पूरा दीवान बनता जा रहा है।
इस शेर में दाग़ अपनी ही शायरी के जादू पर इतराते हुए बड़े प्यार से खुद को टोक रहे हैं। उन्हें लगता है कि उनकी क़लम से निकला एक अदना सा शे'र इतना गहरा और वसीअ होता जा रहा है कि मानो पूरी किताब यानी 'दीवान' बन गया हो। अब उन्हें डर है कि इस बेपनाह ख़ूबसूरती को कहीं ज़माने की नज़र न लग जाए, इसलिए वो खुद को ख़ामोश रहने की सलाह देते हैं। यह अपनी प्रतिभा पर नाज़ करने और शेराना ख़ुद्दारी को दर्शाने का बेहद प्यारा अंदाज़ है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
