ग़ज़ल

अच्छी सूरत पे ग़ज़ब टूट के आना दिल का

اچھی صورت پہ غضب ٹوٹ کے آنا دل کا
दाग़ देहलवी· Ghazal· 14 shers· radif: दिल का

यह ग़ज़ल हुस्न और जवानी के उस दौर की याद दिलाती है जब दिल बेकाबू होकर किसी खूबसूरत चेहरे पर फिदा हो जाता था। इसमें आशिक़ के दिल की बेकरारी, गुज़रे ज़माने की हसरतों और इश्क़ के दर्द भरे फ़साने का बेहद भावुक और दिलकश चित्रण किया गया है।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
अच्छी सूरत पे ग़ज़ब टूट के आना दिल का याद आता है हमें हाए ज़माना दिल का
किसी सुंदर चेहरे पर दिल का इस तरह बुरी तरह फ़िदा हो जाना; अफ़सोस, मुझे अपने दिल का वह पुराना ज़माना याद आता है।
2
तुम भी मुँह चूम लो बे-साख़्ता प्यार आ जाए मैं सुनाऊँ जो कभी दिल से फ़साना दिल का
अगर मैं कभी सच्चे दिल से अपने दिल की दास्तान सुनाऊँ, तो तुम्हें भी बेसाख़्ता इतना प्यार आ जाएगा कि तुम मेरा मुँह चूम लोगे।
3
निगह-ए-यार ने की ख़ाना-ख़राबी ऐसी न ठिकाना है जिगर का न ठिकाना दिल का
महबूब की नज़र ने ऐसी तबाही मचाई है कि अब न जिगर का कोई ठिकाना रहा है और न दिल का।
4
पूरी मेहंदी भी लगानी नहीं आती अब तक क्यूँकर आया तुझे ग़ैरों से लगाना दिल का
तुम्हें अभी तक ठीक से मेहंदी लगाना भी नहीं आता, फिर भला तुम्हें गैरों से दिल लगाना कैसे आ गया?
5
ग़ुंचा-ए-गुल को वो मुट्ठी में लिए आते थे मैं ने पूछा तो किया मुझ से बहाना दिल का
वे अपनी मुट्ठी में गुलाब की कली लिए आ रहे थे, और जब मैंने पूछा कि यह क्या है, तो उन्होंने बहाना बनाकर कह दिया कि यह दिल है।
6
इन हसीनों का लड़कपन ही रहे या अल्लाह होश आता है तो आता है सताना दिल का
हे अल्लाह, इन सुंदरियों का लड़कपन ही बना रहे, क्योंकि जैसे ही इन्हें होश और समझ आती है, वैसे ही दिल को सताना भी आ जाता है।
7
दे ख़ुदा और जगह सीना ओ पहलू के सिवा कि बुरे वक़्त में हो जाए ठिकाना दिल का
ईश्वर सीने और पहलू के अलावा भी कोई और जगह दे, ताकि बुरे वक़्त में दिल को कोई दूसरा ठिकाना मिल सके।
8
मेरी आग़ोश से क्या ही वो तड़प कर निकले उन का जाना था इलाही कि ये जाना दिल का
वह मेरी बांहों से किस तड़प के साथ अलग हुए; हे ईश्वर, यह उनका जाना था या मेरे दिल का रुख़सत हो जाना?
9
निगह-ए-शर्म को बे-ताब किया काम किया रंग लाया तिरी आँखों में समाना दिल का
मेरे दिल का तुम्हारी आँखों में समा जाना आखिरकार रंग ले आया। इसने तुम्हारी शर्मीली निगाह को भी बेचैन करके क्या खूब कमाल कर दिखाया है।
10
उँगलियाँ तार-ए-गरेबाँ में उलझ जाती हैं सख़्त दुश्वार है हाथों से दबाना दिल का
उँगलियाँ फटे गिरेबान के धागों में उलझ जाती हैं, हाथों से बेचैन दिल को दबाना और काबू में रखना बेहद मुश्किल है।
11
हूर की शक्ल हो तुम नूर के पुतले हो तुम और इस पर तुम्हें आता है जलाना दिल का
तुम हूर जैसी सूरत वाली हो और नूर का पुतला हो, और उस पर तुम्हें दिल जलाना भी खूब आता है।
12
छोड़ कर उस को तिरी बज़्म से क्यूँकर जाऊँ इक जनाज़े का उठाना है उठाना दिल का
मैं अपने दिल को वहीं छोड़कर तुम्हारी महफ़िल से कैसे जाऊं? दिल को यहाँ से उठाना तो किसी जनाज़े को उठाने के बराबर है।
13
बे-दिली का जो कहा हाल तो फ़रमाते हैं कर लिया तू ने कहीं और ठिकाना दिल का
जब मैंने महबूब से अपने दिल की बेजारी और उदासी का हाल कहा, तो उन्होंने जवाब दिया कि लगता है तुमने अपने दिल का ठिकाना कहीं और बना लिया है।
14
बा'द मुद्दत के ये ऐ 'दाग़' समझ में आया वही दाना है कहा जिस ने न माना दिल का
ऐ दाग़, एक लंबे अरसे के बाद मुझे यह बात समझ में आई है कि वास्तव में वही इंसान समझदार है जिसने अपने दिल का कहना नहीं माना।
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