बा'द मुद्दत के ये ऐ 'दाग़' समझ में आया वही दाना है कहा जिस ने न माना दिल का

“After ages, O Dagh, this truth at last has dawned on me: truly wise is only he who never heeded the heart's decree.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

ऐ दाग़, एक लंबे अरसे के बाद मुझे यह बात समझ में आई है कि वास्तव में वही इंसान समझदार है जिसने अपने दिल का कहना नहीं माना।

विस्तार

दाग़ साहब यहाँ ज़िंदगी भर इश्क़ की ठोकरें खाने के बाद एक तल्ख़ मगर ख़ूबसूरत सच्चाई बयां कर रहे हैं। वे कहते हैं कि उम्र गुज़रने पर समझ आया कि असल में समझदार वही इंसान था, जिसने अपने जज़्बाती दिल के बहकावे में न आकर अक़्ल की बात मानी। इस शेर में एक मीठा सा पछतावा और गहरा तंज़ है, क्योंकि दिल की न सुनना भले ही अक़्लमंदी हो, मगर ज़िंदगी की असल दास्तानें तो दिल की बात मानकर ही बनती हैं।

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