तुम भी मुँह चूम लो बे-साख़्ता प्यार आ जाए मैं सुनाऊँ जो कभी दिल से फ़साना दिल का

“You too would kiss my face in a spontaneous surge of love, if ever from the depths of my heart I recounted the tale of this heart.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

अगर मैं कभी सच्चे दिल से अपने दिल की दास्तान सुनाऊँ, तो तुम्हें भी बेसाख़्ता इतना प्यार आ जाएगा कि तुम मेरा मुँह चूम लोगे।

विस्तार

यह शेर दिल के अनकहे दर्द और बेपनाह मोहब्बत की सच्चाई को बड़ी नज़ाकत से बयां करता है। शायर महबूब से कहता है कि अगर वह अपनी दास्तान पूरी शिद्दत और सच्चाई से सुना दे, तो महबूब की सारी बेरुखी एक पल में पिघल जाएगी। यहाँ 'मुँह चूम लेने' की बात महबूब के दिल में उमड़ने वाले उस बे-साख़्ता प्यार और हमदर्दी की निशानी है, जो किसी सच्चे आशिक़ के जज़्बात सुनकर अपने आप छलक उठता है।

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