“How can I depart your gathering, leaving it behind? / To bear away this heart is like lifting a funeral bier.”
मैं अपने दिल को वहीं छोड़कर तुम्हारी महफ़िल से कैसे जाऊं? दिल को यहाँ से उठाना तो किसी जनाज़े को उठाने के बराबर है।
शायर यहाँ महबूब की महफ़िल से रुख़्सत होने के असहनीय दर्द को बयां कर रहे हैं। इश्क़ में दिल इतना टूट चुका है कि वह बिल्कुल बेजान हो गया है, और उसे वहाँ से समेट कर ले जाना किसी भारी जनाज़े को कंधा देने जैसा लगता है। यह महफ़िल से सिर्फ़ जुदा होना नहीं है, बल्कि अपने ही मरे हुए दिल को दफ़नाने ले जाने का एक बेहद गहरा और दर्दनाक मंज़र है।
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