पूरी मेहंदी भी लगानी नहीं आती अब तक क्यूँकर आया तुझे ग़ैरों से लगाना दिल का

“You do not even know as yet to paint your hands with henna; how did you learn so soon, my love, to give your heart to strangers?”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

तुम्हें अभी तक ठीक से मेहंदी लगाना भी नहीं आता, फिर भला तुम्हें गैरों से दिल लगाना कैसे आ गया?

विस्तार

इस शेर में आशिक़ अपनी महबूबा की मासूमियत और अपनी मीठी-सी जलन को बड़ी नज़ाकत से बयां कर रहा है। वह कहता है कि अभी तो तुम्हें हाथों पर ढंग से मेहंदी रचाना भी नहीं आया, जो अल्हड़पन और न समझी की निशानी है। फिर इतनी कम उम्र में तुमने ग़ैरों से दिल लगाने जैसा संजीदा और पेचीदा हुनर इतनी जल्दी कैसे सीख लिया? यहाँ 'मेहंदी लगाना' और 'दिल लगाना' के दरमियान का ख़ूबसूरत लफ़्ज़ी खेल इस शिकवे को और भी दिलकश बना देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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