ग़ज़ल

गिला नहीं है हमें अपनी जाँ-गुदाज़ी का

गिला नहीं है हमें अपनी जाँ-गुदाज़ी का

यह ग़ज़ल अपने प्रेम में होने वाले गहरे और जटिल आघातों को स्वीकार करती है। कवि कहता है कि वह न तो अपनी बेवफाई (जाँ-गुदाज़ी) पर शिकायत करता है, न ही प्रिय की ज़ुबान से लगे घावों (ज़बाँ-दराज़ी) पर। यह प्रेम एक ऐसी स्थिति है जहाँ सब कुछ विलासिता और दर्द का मिश्रण है, और यहाँ भी दर्द ही एक तरह का शौक़ बन चुका है।

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शेर दर शेर अर्थ

लिपि व अर्थ
1
गिला नहीं है हमें अपनी जाँ-गुदाज़ी का जिगर पे ज़ख़्म है उस की ज़बाँ-दराज़ी का
हमें अपनी स्वयं की पीड़ा का कोई शिकायत नहीं है, लेकिन हमारे हृदय को उसकी जीभ के विष से घाव है।
2
समंद-ए-नाज़ ने उस के जहाँ किया पामाल वही है अब भी उसे शौक़ तर्क ताज़ी का
समंद-ए-नाज़ ने उसके जहाँ को पामाल कर दिया, फिर भी उसे अब भी ताज़गी भरे तर्क का शौक है।
3
सितम हैं क़हर हैं लौंडे शराब-ख़ाने के उतार लेते हैं अमामा हर नमाज़ी का
शराब-ख़ाने के लड़कों का सतावा और क्रोध इतना है कि वे हर नमाज़ पढ़ने वाले का पगड़ी उतार देते हैं।
4
उलट-पलट मिरी आह-ए-सहर की क्या है कम अगर ख़याल तुम्हें होवे नेज़ा-बाज़ी का
उलट-पलट मिरी आह-ए-सहर की क्या है कम, अगर ख़याल तुम्हें होवे नेज़ा-बाज़ी का। (अर्थ: जब मन का ध्यान भाले की कला की ओर हो, तो सुबह की हवा की हल्की सी शिकायत क्या है।)
5
बताओ हम से कोई आन तुम से क्या बिगड़ी नहीं है तुम को सलीक़ा ज़माना-साज़ी का
बताओ हमें कोई बात, तुम से क्या बिगड़ी है? तुम को दुनियादारी का सलीक़ा नहीं है।
6
ख़ुदा को काम तो सौंपे हैं मैं ने सब लेकिन रहे है ख़ौफ़ मुझे वाँ की बे-नियाज़ी का
मैंने सब कुछ भगवान को सौंप दिया है, लेकिन मुझे दुनिया की अस्थिरता का डर अभी भी है।
7
चलो हो राह-ए-मुआफ़िक़ कहे मुख़ालिफ़ के तरीक़ छोड़ दिया तुम ने दिल-नवाज़ी का
चलो हो राह-ए-मुआफ़िक़ कहे मुख़ालिफ़ के तरीक़ छोड़ दिया तुम ने दिल-नवाज़ी का। इसका शाब्दिक अर्थ है कि आओ, हम उस रास्ते पर चलें जो विरोधी के कहे गए तरीके से मेल खाता हो; तुमने तो दिल को बहलाने का तरीका छोड़ दिया है।
8
कसो की बात ने आगे मिरे न पाया रंग दिलों में नक़्श है मेरी सुख़न-तराज़ी का
जो बात मैंने कही, उसका कोई रंग आगे नहीं मिला; मेरे सुखद छंदों का नक़्श दिलों पर है।
9
बसान-ए-ख़ाक हो पामाल राह-ए-ख़ल्क़ ऐ 'मीर' रखे है दिल में अगर क़स्द सरफ़राज़ी का
हे मीर, अगर दिल में शोहरत की चाहत है, तो इंसानों का रास्ता धूल का स्नान बन जाए।
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