बसान-ए-ख़ाक हो पामाल राह-ए-ख़ल्क़ ऐ 'मीर' — मीर तक़ी मीर

बसान-ए-ख़ाक हो पामाल राह-ए-ख़ल्क़ ऐ 'मीर' रखे है दिल में अगर क़स्द सरफ़राज़ी का

“Oh Mir, let the path of humanity become a dust-bath, If in the heart, the intention is for glory's sake.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हे मीर, अगर दिल में शोहरत की चाहत है, तो इंसानों का रास्ता धूल का स्नान बन जाए।

विस्तार

यह शेर इंसान के अंदर के उस स्वार्थ को दिखाता है, जो अक्सर रिश्तों और नैतिकता को रौंद देता है। शायर कहते हैं कि अगर दिल में सिर्फ अपनी शान या स्वार्थ की चाहत हो, तो इंसानियत का रास्ता धूल में मिल जाएगा। यह एक कड़वा सच है, जो बताता है कि कब अपना 'मैं' (ego) हमें इंसानियत से दूर कर देता है। बहुत गहरा तजुर्बा है यह!

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