उलट-पलट मिरी आह-ए-सहर की क्या है कम — मीर तक़ी मीर
“What is the little complaint of the morning breeze, If your thoughts turn towards the art of the spear?”
अर्थ
उलट-पलट मिरी आह-ए-सहर की क्या है कम, अगर ख़याल तुम्हें होवे नेज़ा-बाज़ी का। (अर्थ: जब मन का ध्यान भाले की कला की ओर हो, तो सुबह की हवा की हल्की सी शिकायत क्या है।)
विस्तार
यह शेर एक गहरा विरोधाभास प्रस्तुत करता है। शायर मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि मेरी सुबह की आह का क्या मोल, अगर तुम्हारे मन में नज़ा-बाज़ी का ख़याल आ जाए। यह नज़ा-बाज़ी केवल युद्ध का हथियार नहीं, बल्कि प्रेम की तीव्र, निर्णायक भावना का प्रतीक है। मीर का मानना है कि जब प्रेम इतना प्रबल हो जाए कि वह सीधे वार जैसा हो, तो सुबह की हल्की सी उदासी या आह का कोई महत्व नहीं रह जाता।
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