गिला नहीं है हमें अपनी जाँ-गुदाज़ी का — मीर तक़ी मीर

गिला नहीं है हमें अपनी जाँ-गुदाज़ी का जिगर पे ज़ख़्म है उस की ज़बाँ-दराज़ी का

“We have no complaint regarding our self-inflicted wounds, But our heart bleeds from the venom of her tongue.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हमें अपनी स्वयं की पीड़ा का कोई शिकायत नहीं है, लेकिन हमारे हृदय को उसकी जीभ के विष से घाव है।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर के दर्द भरे एहसास को बयां करता है। शायर कहते हैं कि उन्हें अपनी खुद की तड़प या जाँ-गुदाज़ी का कोई गिला नहीं है.... लेकिन उनके जिगर पर जो ज़ख़्म है, वह तो बस महबूब की मीठी बातों, उसकी ज़बान-दराज़ी का है। यह बताता है कि सबसे गहरा दर्द अक्सर बातों में छिपा होता है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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